विदेशमंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य होने के नाते भारत ने वैश्विक संस्था की सफलता के लिए बहुत काम किया है और इसके लक्ष्यों तथा सदस्य देशों की उम्मीदों के अनुसार मजबूती से आगे भी काम करता रहेगा।
वह संयुक्त राष्ट्र के 75 वर्ष पूरे होने पर स्मृति डाक टिकट जारी करने के बाद बोल रहे थे। डाक विभाग ने 1954, 1985 और 1995 में संयुक्त राष्ट्र की क्रमश: नौवीं, 40वीं और 50वीं वर्षगांठ पर भी डाक टिकट जारी किया था।
जयशंकर ने कहा, संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्य के तौर पर भारत ने अपनी आत्मा के साथ संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों को तैयार करने और शांति बनाने में काम किया। संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षा मिशन के लिए शांति सैनिकों को भेजने में भी भारत का अहम योगदान है।
न्होंने कहा, दुनिया के देशों को एक जगह लाने और मानवता के बेहतर भविष्य के सपनों को पूरा करने के मंच के तौर पर संयुक्त राष्ट्र ने सराहनीय काम किया। भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के तौर पर अपने आठवें कार्यकाल के लिए उत्सुक है। भारत दो साल के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुना गया है। उसका कार्यकाल जनवरी 2021 से शुरू होगा।
बदलते समय को ध्यान में रख साथ आए भारत जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया: जयशंकर
विदेशमंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि क्वाड या चतुर्भुज गठबंधन के तहत भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया का एकसाथ आना बदलते समय को ध्यान में रखते हुए और बहुध्रुवीय दुनिया के विकसित होते परिदृश्य का प्रतिबिंब है।
उन्होंने कहा कि सत्ता के भू-राजनीतिक संतुलन में हर परिदृश्य और चरण अपनी सोच और रणनीति बनाता है। उन्होंने स्वतंत्र भारत समग्र दृष्टिकोण में अपनी स्थिरता बनाए रखते हुए खुद को अलग-अलग स्थितियों में व्यक्त करेगा।
पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित कॉन्फ्रेंस में उन्होंने शीत युद्ध समेत पिछले कुछ दशकों में वैश्विक सत्ता संतुलन में बदलाव और पश्चिमी प्रभुत्व का जिक्र किया और कहा कि चीन का अभ्युदय एक बड़ी भू-राजनीतिक घटना है।