सांख्यिकी मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाएं घर के काम में पुरुषों से तीन गुना ज्यादा समय बिताती हैं। महिलाएं रोजाना औसतन 289 मिनट घरेलू काम करती हैं, जबकि पुरुष सिर्फ 88 मिनट। हालांकि, अब महिलाएं बाहर कमाई वाले कामों में भी पहले से ज्यादा समय दे रही हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी भागीदारी तेजी से बढ़ी है।
घर के काम में महिलाएं रोजाना औसतन 289 मिनट खर्च करती हैं, जबकि पुरुष सिर्फ 88 मिनट। महिलाओं को बाहर कमाई के लिए अब पहले से ज्यादा समय देना पड़ता है। महिलाओं का देश की आर्थिक गतिविधियों में योगदान बढ़ रहा है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने महिला और पुरुष 2025 रिपोर्ट के तहत महिलाओं की आर्थिक भागीदारी पर ये तथ्य उजागर किए हैं।
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इसके मुताबिक साल 2019 से 2024 तक पुरुषों का बिना वेतन वाले कार्यों में प्रतिदिन बिताया जाने वाला औसत समय बढ़ा है। महिलाओं का वेतन वाले कार्यों में बिताया जाने वाला औसत समय बढ़ा है। यानी उन्हें अब आमदनी के लिए पहले से ज्यादा काम करना पड़ता है। पुरुषों और महिलाओं के लिए 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लिए श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) में वृद्धि हुई है। विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं में एलएफपीआर में सबसे अधिक वृद्धि 2022 से 2025 की अवधि के दौरान 37.5 प्रतिशत से बढ़कर 45.9 प्रतिशत हो गई है। वर्ष 2025 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लिए कार्यबल जनसंख्या अनुपात पुरुषों के लिए 76.6 प्रतिशत और महिलाओं के लिए 38.8 प्रतिशत है। दोनों लिंगों के लिए शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यबल जनसंख्या अनुपात अधिक है।