भारत सोमवार को मिसाइल टेक्नॉलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) का सदस्य बन गया। साल 1987 में बने इस समूह का उद्देश्य दुनिया में मिसाइल तकनीक के व्यापार पर नियंत्रण और निगरानी रखना है। महाविनाश के हथियारों को स्थिर करने के लिए तकनीक के बारे में दुनिया भर में जितनी भी पाबंदियां लगाई गई हैं, वो सब भारत को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं।
मिसाइल तकनीक के व्यापार के नियंत्रण के लिए एमटीसीआर ने कई तरह के नियम-कानून बनाए हैं और पाबंदियां लगाई हैं। भारत इसका शिकार उस समय हुआ, जब रूस ने क्रायोजनिक इंजन देने की कोशिश की। लेकिन बाकी के देशों के विरोध की वजह से रूस ऐसा नहीं कर पाया था।
एमटीसीआर का सदस्य बनने के बाद हम दुनिया के अन्य देशों के पास मौजूद मिसाइल की आधुनिक तकनीक को उनसे हासिल कर सकते हैं। वहीं इसका दूसरा फायदा यह है कि भारत अगर अपनी मिसाइल तकनीक जैसे ब्रह्मोस को अगर किसी दूसरे देश को देना चाहता है, तो वह एमटीसीआर का सदस्य होने की वजह से दे सकता है।
एमटीसीआर का सदस्य बनने के बाद भारत की चुनौती पाकिस्तान के एक्यू खान नेटवर्क को बढ़ने से रोकना है, जिसे पाकिस्तान ने बढ़ावा दिया। एक्यू खान नेटवर्क को दुनिया का न्यूक्लियर वॉलमार्ट भी कहा जाता था। वह परमाणु तकनीक के गैर कानूनी धंधे का नेटवर्क था।इसी नेटवर्क के जरिए कई देश उन्नत मिसाइल तकनीक को हासिल करने की फिराक में थे, इनमें पाकिस्तान और उत्तर कोरिया जैसे देश शामिल हैं। इसे चीन का समर्थन हासिल था। यह दुनिया के लिए खतरा है।