बातचीत में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि मिसाइल खरीद के लिए बातचीत पूरी हो चुकी है। साथ ही वित्तिय पक्ष को भी अंतिम रूप दे दिया गया है। वहीं रक्षा मंत्रालय का यह भी मत है कि रूस चीन के साथ भी रक्षा संबंधी सौदे करता है और यदि भारत ऐसे सौदे को नहीं करेगा तो वह अपनी मिसाइल आदि पाकिस्तान को भी बेच सकता है शायद चीन के माध्यम से ही सही।
उन्होंने बताया कि अतीत में भी रूसी आरडी-93 इंजनों को पाकिस्तान में जेएफ-17 सेनानियों के लिए चीनी मार्ग के माध्यम से आपत्तियों के बावजूद सप्लाई किया गया था।
अधिकारी ने यह भी बताया कि इस बात की घोषणा पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति
व्लादिमीर पुतिन के बीच अक्टूबर में होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन से पहली की जा सकती है। बता दें अमेरिका ने 'काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन्स एक्ट' (सीएएटीएसए) के तहत रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं। इसलिए दोनों देश इस सौदे पर अमेरिका के प्रतिबंधों से बचाने के लिए रास्ते तलाश रहे हैं।
माना जा रहा है कि यह मुद्दा तब भी उठा भी जब पीएम मोदी ने सोची में पुतिन से मुलाकात की थी। उल्लेखनीय है कि भारत करीब 4,000 किलोमीटर लंबी चीन-भारत सीमा पर अपनी वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियां खरीदना चाहता है। जिसमें एस-400 और एस-300 बेहतर संस्करण हैं। बता दें अलमाज एन्टो द्वारा उत्पादित यह मिसाइल प्रणाली रूस में साल 2007 से सेवा में है।
वहीं भारत उन आपत्तियों पर भी ध्यान दे रहा है जिन्हें अमेरिकी संसद की हथियार से संबंधित सिमिति के अध्यक्ष विलियम थोर्नबेरी ने उठाया था। थोर्नबेरी को इस सौदे से आपत्ति थी जिस पर उन्होंने कहा था कि यदि यह डील हुई तो वह सीएएटीएसए एक्ट लगा देंगे।
अब 6 जुलाई को वाशिंगटन में एस-400 प्रणाली सौदे पर भारतीय विदेश मंत्री
सुषमा स्वराज व रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो व रक्षा मंत्री जिम मैटिस के साथ बातचीत करेंगी। इस वार्ता में दोनों पक्ष अपनी अपनी रक्षा संबंधित चिंताओं को साझा करेंगे ताकि द्विपक्षीय संबंधों में बिना किसी बाधा आए इस समस्या को हल किया जा सके।