जावडे़कर के मुताबिक, ओईसीडी ने वर्ष 2000 में इस परीक्षा की शुरुआत की थी। पीसा परीक्षा में 15 वर्ष आयु वर्ग तक 9वीं व 10वीं के छात्रों की पढ़ाई, गणित व विज्ञान विषय के लर्निंग लेवल का आकलन होता है। इस परीक्षा में दुनियाभर के 80 देशों के छात्र भाग ले रहे हैं। समझौते के दौरान केंद्र सरकार, विश्व बैंक के अधिकारी भी मौजूद रहे।
गौरतलब है कि वर्ष 2009 में खराब प्रदर्शन के चलते यूपीए ने भारत में पीसा परीक्षा बायकाट कर दी थी। इसी के चलते वर्ष 2012 और 2015 की परीक्षा में भारत शामिल न हो सका। यूपीए सरकार के बाद मोदी सरकार सत्ता में आई। इसी के चलते सरकार ने वर्ष 2016 में पीसा में भाग लेने का फैसला किया, लेकिन तीन साल पहले अनुमति न लेने के चलते भारत चाहकर भी शामिल नहीं हो सका।
2021 में आयोजित होने वाली परीक्षा में चंडीगढ़ के सरकारी व निजी स्कूलों के छात्र चयन के आधार पर भाग लेंगे। इसमें केंद्रीय विद्यालय संगठन, नवोदय विद्यालय समिति के अलावा यूटी चंडीगढ़ प्रशासन के सरकारी स्कूल शामिल रहेंगे। परीक्षा में 9वीं से 10वीं के छात्र भाग ले सकते हैं। पीसा के लिए चंडीगढ़ प्रशासन केंद्र सरकार के नियमों के तहत तैयारी करवाएगा।
चीन के आइडिया से हुआ चंडीगढ़ का चयन
चीन ने पीसा में भाग लेने के लिए शंघाई को चुना था। इसी आइडिया को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने 2021 पीसा परीक्षा के लिए चंडीगढ़ के करीब 100 स्कूलों को चुना है। इसमें सरकारी, निजी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के छात्र शामिल होंगे। दरअसल, चंडीगढ़ यूटी होने के चलते केंद्र सरकार के अधीन है। केंद्र सरकार तीन साल का समय होने के चलते अपने मुताबिक, छात्रों व शिक्षकों को पीसा परीक्षा के तहत ट्रेनिंग देकर तैयार करेगी। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन बेहद अच्छा है। इसके अलावा इंग्लिश मीडियम होने के चलते अधिक दिक्कत नहीं आएगी।