रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत फिलहाल अफगानिस्तान में अपनी सेना नहीं भेजेगा। लेकिन वहां के विकास कार्यों और चिकित्सा सुविधाओं में अपना योगदान जारी रखेगी। मंगलवार को दिल्ली में अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मेटिस के साथ हुई बातचीत में निर्मला ने अपना पक्ष रखा।
दोनों रक्षा मंत्रियों के बीच हुई मुलाकात में इस बात पर सहमति बनी कि आतंकवाद के पनाहगारों को किसी भी सूरत में कहीं भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही इस मुलाकात में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर कई अहम फैसले लिए गए।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप के अफगानिस्तान में भारत की अहम भागेदारी पर की गई टिप्पणी के मद्देनजर निर्मला का यह बयान अहम माना जा रहा है। ट्रंप सरकार केगठन के बाद मेटिस पहले अमेरिकी सरकार के कैबिनेट मंत्री हैं जो भारत के दौरेपर हैं। तीन दिन का यात्रा पर आए मेटिस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत दोभाल से भी मुलाकात करेंगे।
प्रतिनिधिमंडल स्तर की इस मुलाकात के बाद संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में निर्मला ने कहा कि भारत और अमेरिका इस बात पर सहमत हैं कि दुनिया के किसी भी कोने में आतंकवाद के पनाहगारों को खतम किया जाएगा। मेटिस ने वादा किया है कि वह अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान वहां की सरकार से इस बारे में अपने स्तर पर बात करेंगे।
निर्मला के मुताबिक दोनों देश आतंकवाद से समान रुप से प्रभावित है। निर्मला ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में कई अहम करार हुए हैं। अब इसे आगे बढाने के लिए दोनों देश तत्पर हैं।