खास बात है कि इस बार भारतीय एजेंसियों ने आतंकियों के हमदर्द बने पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारियों के नामों का जिक्र भी किया है। दो साल पहले भी एनआईए ने अपनी चार्जशीट में साफ तौर पर यह बात कही थी कि पाकिस्तानी उच्चायोग के जरिए आतंकियों को धन व दूसरी मदद पहुंचाई जा रही है।
इस बार रॉ व एनटीआरओ जैसी खुफिया इकाईयों के जरिए यह पता लगाया गया है कि पाकिस्तानी उच्चायोग में वे कौन से अधिकारी हैं, जो सीधे तौर पर आतंकियों व अलगाववादियों से जुड़े हैं। अलगाववादियों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि पाकिस्तान की आईएसआई और उच्चायोग की मदद से धन कश्मीर में पहुंचता है। दुबई में पाकिस्तान के आतंकी संगठनों के मददगार दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास के जरिए धन भेजते रहे हैं। हालांकि यह धन विभिन्न संस्थाओं के नाम पर आता है।
वजह, भारतीय एजेंसियों को शक न हो, इसके लिए पाकिस्तानी उच्चायोग की मदद ली जाती है। यहां से उस धन को आतंकियों तक पहुंचाने वाले लोगों, जिनमें अलगाववादी शामिल हैं, के हवाले कर दिया जाता है। करीब तीन दर्जन अलगाववादी एनआईए और ईडी के रडार पर हैं। एनआईए के एक अधिकारी का दावा है कि बहुत जल्द कई अलगाववादी नेता पुलिस की हिरासत में होंगे। इनके खिलाफ जांच एजेंसी के पास पर्याप्त सबूत हैं।
आतंकी फंडिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाउद्दीन की जम्मू-कश्मीर में 13 संपत्तियों को जब्त कर लिया है। फिलहाल सलाउद्दीन पाकिस्तान के रावलपिंडी में रहता है। ईडी ने कहा कि सलाउद्दीन, शाह और अन्य के खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत दायर किए गए आरोप पत्र पर संज्ञान लेने के बाद धनशोधन का आपराधिक मामला दर्ज किया था।
इससे पहले जांच में सामने आया था कि आतंकवादी हाफिज सईद के कथित कैशियर अहमद शाह वटाली जो कि कश्मीर में व्यवसाय करते थे, हुर्रियर एवं दूसरे अलगाववादी संगठनों की मदद से आतंकियों व पत्थरबाजों को आगे लाने के लिए धन मुहैया कराते रहे हैं।वटाली अभी तिहाड़ जेल में हैं। इसके अलावा एनआईए ने 26 फरवरी को कई अलगाववादी नेताओं के ठिकानों पर छापे मारे थे।
इनमें जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के चेयरमैन यासीन मलिक, जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी के अध्यक्ष शब्बीर शाह,अवामी एक्शन कमेटी के चेयरमैन मीरवायज उमर फारुख, तहरीक-ए-हुर्रियत के चेयरमैन मोहम्मद अशरफ खान, एपीएचसी के महासचिव मशरत आलम, जेकेएसएम के चेयरमैन जफर अकबर भट्ट और सैयद अली गिलानी के पुत्र नसीम गिलानी शामिल हैं।
इनके कब्जे से कई अहम दस्तावेज, जिनमें प्रॉपर्टी पेपर, बैंक स्टेटमेंट व रुपयों के लेन-देन से संबंधित अन्य कागजात आदि बरामद किए गए हैं। कुछ लैपटॉप, ई-टेबलेट, मोबाइल फोन, पेनड्राइव और डीवीआर सिस्टम भी मिले हैं।जांच एजेंसी ने इन नेताओं के घर-दफ्तरों से कई आतंकवादी संगठनों के लैटर हैड और पाकिस्तान के शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए वीजा फॉर्म भी बरामद किए गए हैं। इतना ही नहीं, मीरवायज उमर फारुख के निवास से हाईटेक इंटरनेट संचार उपकरण भी जांच एजेंसी के हाथ लगे हैं।