दुनिया भर में समस्या का सबब बने कोरोना वायरस के इलाज के लिए दवा या वैक्सीन विकसित करने पर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। हालांकि, यह राह इतनी आसान नहीं है इसे देखते हुए कुछ ऐसी पुरानी दवाओं का भी इस्तेमाल किया जा रहा है जो कोरोना के असर को कम करने में असरदार सिद्ध हो सकती है।
इस दवा को लेकर गुरुवार को हुई नीति आयोग की प्रेस वार्ता में डॉ. वीके पॉल ने कहा कि इस पर दुनिया भर में काम चल रहा है। इसके साइड इफेक्ट भी कम हैं। कोरोना एक नया वायरस है। हमने इस दवा के संबंध में वैज्ञानिकों से बात की तो यही सामने आया कि यह वायरस के प्रवेश को रोकता है ये सब जानते हैं।
वहीं, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने इस पर कहा है कि भारत में किए गए अध्ययनों में इस मलेरिया रोधी दवा के साइड इफेक्ट नहीं देखे गए हैं और इस दवा से कोरोना के मरीजों को आराम भी मिला है। इसलिए गहन चिकित्सा पर्यवेक्षण यानी विशेषज्ञों की निगरानी में इसका इस्तेमाल जारी रखा जाएगा।
भारतीय कंपनियां बड़े पैमाने पर इस दवा का उत्पादन करती हैं। पिछले महीने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोविड 19 के इलाज में इस दवा को असरदार बताया था। कोरोना मरीजों के इलाज में मददगार होने की बात सामने आने पर बाद भारत ने दुनिया के कई देशों को इस दवा की आपूर्ति की है।
ट्रंप के तरह ही ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो ने भी कोरोना के इलाज के लिए इस दवा के इस्तेमाल की वकालत की थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से इस दवा के ट्रायल पर रोक लगाने के बावजूद ब्राजील ने कहा है कि वह कोविड-19 के इलाज के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल पर रोक नहीं लगाएगा।