धूम्रपान करने वाले सबसे ज्यादा उपभोक्ताओं वाले देश चीन को भारत तंबाकू के पत्ते निर्यात करेगा। इससे वैश्विक तंबाकू बाजार में भारत की स्थिति काफी मजबूत होगी। साथ ही देश में तंबाकू किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरने के आसार हैं। भारत और चीन के बीच भारतीय उत्पादों को चीन के बाजार में प्रवेश देने सहित विभिन्न मुद्दों पर बातचीत हुई है।
वाणिज्य मंत्रालय ने पिछले सप्ताह बीजिंग में हुई दो पक्षीय वार्ता के बारे में जानकारी दी। देश के वाणिज्यिक सचिव अनूप वाधवन और चीन के सीमा शुल्क सामान्य प्रशासन(जीएसीसी) के उप मंत्री झांग जिवेन के बीच भारतीय उत्पादों का चीनी बाजार में प्रवेश को लेकर वार्ता हुई थी।
चीन में करीब 35 करोड़ लोग धूम्रपान करते हैं। तंबाकू उत्पादन करने और उपभोग करने में चीन सबसे आगे है। चीन में तंबाकू उपभोक्ताओं की संख्या विश्व के कई देशों की आबादी से भी ज्यादा है।
चावल, मछली के चारा व तेल का भी होगा निर्यात
भारत और चीन के बीच हुई वार्ता में भारत से गैर बासमती चावल, मछली के चारे और मछली के तेल के निर्यात के प्रोटोकोल को लेकर समझौता हुआ है। जीएसीसी ने छह भारतीय मिलों को चीन को रैपसीड मील के निर्यात की भी अनुमति दी है।
भारत से तंबाकू के पत्तों को चीन को निर्यात किए जाने की व्यवस्थाओं के बारे में भी विस्तार से बातचीत करते हुए एक समझौता किया गया है। हाल की अवधि में भारत के बहुत से कृषिगत एवं संबद्ध उत्पादों के लिए बाजार पहुंच के संदर्भ में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
व्यापार घाटा कम करने को महत्वपूर्ण
यह वार्ता इसलिए भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है क्योंकि भारत चाहता है कि चीन को उसके निर्यात में बढ़ोतरी हो, क्योंकि व्यापार घाटा काफी ऊंचाई पर पहुंच चुका है। 2017-18 चीन के साथ व्यापार में व्यापार घाटा 63.12 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 51.08 अरब डॉलर था।
वाणिज्य सचिव ने जीएसीसी से अनुरोध किया कि वे भिंडी, सोयाबीन, पशुओं के मांस और दूध उत्पादों जैसे अन्य उत्पादों के लिए जल्द ही बाजार पहुंच कायम करे।