केंद्रीय संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को कहा, भारत ने स्वदेशी 4जी/5जी तकनीक स्टैक से दमखम दिखाया है। इसकी मदद से देश आने वाले तीन वर्षों में दुनिया के लिए प्रमुख दूरसंचार प्रौद्योगिकी निर्यातक के रूप में उभरेगा। वैष्णव ने एक कार्यक्रम में कहा, 4जी/5जी स्टैक तैयार है। शुरू में इसका परीक्षण एक साथ 10 लाख कॉल के लिए किया गया था। फिर 50 लाख और अब एक करोड़ कॉल के लिए परीक्षण किया गया है। यह एक शानदार सफलता है। कम से कम 9-10 देश इसे आजमाना चाहते हैं।
वैष्णव ने भुगतान, स्वास्थ्य सेवा और पहचान जैसे प्लेटफार्मों पर भारत के स्टैक पर परीक्षण किए जा रहे जनसंख्या-स्तर के समाधानों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, इनमें से प्रत्येक मंच अपने आप में शक्तिशाली है, लेकिन साथ मिलकर एक गतिशील शक्ति बनकर उभरता है जो दुनिया की किसी भी बड़ी समस्या को हल कर सकता है। उन्होंने कहा, आज दो भारतीय दूरसंचार कंपनियां हैं जो दुनिया को दूरसंचार तकनीक निर्यात कर रही हैं।
हमारी सफलता को दुनिया ने भी माना
वैष्णव ने कहा, 5जी सेवाओं को एक अक्तूबर, 2022 को लॉन्च किया गया था और 100 दिनों के भीतर 200 से अधिक शहरों में शुरू किया गया है। वैश्विक स्तर पर उद्योग की बड़ी कंपनियों ने भी इस गति की सराहना की है। कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तो इसे ‘दुनिया में कहीं भी सबसे तेजी से विस्तार’ के रूप में वर्णित किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने दूरसंचार, आईटी और रेलवे के अपने तीन मंत्रालयों के तहत प्रमुख पहलों को रेखांकित करते हुए भी जानकारी दी।
रेलवे के निजीकरण की कोई योजना नहीं
वैष्णव ने स्पष्ट किया कि रेलवे के निजीकरण की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा, 1.35 अरब आबादी वाले देश में आठ अरब लोग हर साल रेल से यात्रा करते हैं। हमने सोचा कि दूसरों के अनुभव से सीखना और इसे सरकारी ढांचे के भीतर रखना बुद्धिमानी है। रेलवे में हम यात्री अनुभव को बदलने पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने आधुनिक और भविष्य के डिजाइन ब्लूप्रिंट के साथ स्टेशनों और टर्मिनलों (नई दिल्ली, अहमदाबाद, कानपुर, जयपुर) का पुनर्विकास करने और नए बनाने की प्रक्रिया पर प्रेजेंटेशन भी दी।
10 वर्षों में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देगी सरकार
केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि सरकार बहुत जल्द ऐसा कार्यक्रम लेकर आएगी, जिसका उद्देश्य भारत में अगले दस साल में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा, जब पीएम मोदी ने एक जनवरी, 2022 को सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम को मंजूरी दी, तो हमने वादा किया था कि अगले 14-16 महीनों के भीतर हम कड़ी मेहनत करेंगे, दुनिया के अनुभव से सीखेंगे और एक ऐसा कार्यक्रम लेकर आएंगे जो देश को एक अच्छे रास्ते पर ले जाएगा। उन्होंने कहा, सरकार ने दिसंबर 2021 में 76,000 करोड़ रुपये की लागत से सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम शुरू किया। इसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर के विकास और भारत में प्रदर्शन निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करना था। हमारे वादे का समय इस साल 1 मार्च से पूरा हो रहा है। आने वाले हफ्तों में आपको कोई अच्छी खबर मिलेगी।