आसियान राष्ट्रों में भारत की छवि बेहतर होती जा रही है, सम्मेलनों का तालमेल देखें तो भारत चीन को पीछे छोड़ता जा रहा है और उम्मीद है कि आने वाले समय में भारत आसियान राष्ट्रों में चीन को काफी पीछे छोड़ देगा। जिस तरह से भारत और आसियान राष्ट्रों के बीच एक दूसरे का कल्चर शेयर हो रहा है, उससे ये कहना भी गलत नहीं होगा कि चीन को पछाड़ने में भारत को ज्यादा समय नहीं लगेगा।
गणतंत्र दिवस पर भी भारत में आसियान राष्ट्रों से अतिथि आने वाले हैं, इससे पहले भी भारत ने आसियान राष्ट्रों के अतिथियों का पूरे गर्मजोशी से स्वागत किया है। ना सिर्फ खास मौकों बल्कि शिखर सम्मेलनों में भी भारत आसियान संस्कृति को बढ़ावा देने का काम करता रहा है। हाल ही में आसियान राष्ट्रों से भारत आने वाले पर्यटकों की भी संख्या में इजाफा हुआ। पिछले महीने ही वहां के 500 छात्रों ने भारत के बड़े शहरों- दिल्ली, आगरा, हैदराबाद, मुंबई और पुणे का दौरा किया है।
आसियान और भारत में 25 सालों के पारस्परिक रिश्ते इस बार काफी मजबूत दिखाई दे रहे हैं। 2017 में पीएम नरेंद्र मोदी की फिलीपींस के रॉड्रिगो ड्यूटेटे को लिखी चिट्ठी के बाद ऐसा देखा जाने लगा तो अब आसियान राष्ट्र की अध्यक्षता सिंगापुर के ली सीन लूंग कर रहे हैं और भारत के प्रति उनका रवैया भी काफी आशावादी है। पिछले साल नवंबर में भी नरेंद्र मोदी की तरफ से आसियान राष्ट्रों के सभी नेताओं को आमंत्रण भेजा गया था।
म्यांमार से भारत के धार्मिक रिश्ते भी आसियान में भारतीय कद बढ़ाते हैं। आसियान राष्ट्रों का भारतीय कल्चर के प्रति गहरा रुझान देखने को मिलता रहता है। चाहे बात बौद्ध धर्म की हो या फिर भारतीय कला, संस्कृति की आसियान राष्ट्रों को भारतीय इतिहास से खुद को जोड़े रखने में भी मजबूत संभावना दिखाई देती है।