पेयजल एवं स्वच्छत्ता सचिव अय्यर के अनुसार सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, केरल, हरियाणा, उत्तराखंड, गुजरात, अरूणाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य पूरी तरह से खुले में शौच की समस्या से मुक्त घोषित हो चूके हैं। इनके अलावा चंड़ीगढ़ और दमन एवं द्वीव सरीखे केंद्र शासित प्रदेश भी इस श्रेणी में शूमार हो गए हैं। अय्यर के अनुसार मार्च तक खुले में शौच की समस्या से मुक्त राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या बढ़कर 15 हो जाएगी।
अभियान के वजह से आई बाल मृत्यु दर में कमी
अय्यर ने यूनीसेफ और मिलिंदा गेटस फाउंडेशन के अध्ययनों की रिपोर्ट को पेश करते हुए बताया कि स्वच्छ भारत अभियान का स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ा है। यूनीसेफ के अध्य्यन के अनुसार अभियान के शुरूआत के बाद बाल मृत्यु दर में गिरावट आई है। तो बिल एवं मिलिंदा गेटस फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार खुले में शौच से मुक्त हुए गांव के लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है। उनके स्वास्थ्य सूचकांक में सुधार देखने को मिला है। यूनीसेफ के एक दूसरे शोध के अनुसार खुले में शौच की समस्या से मुक्त गांवों में हर घर को करीब प्रतिवर्ष 50 हजार रूपए की बचत हुई है।