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मेडिकल डिप्लोमेसी: अफगानिस्तान पर चीन-पाक के कुटिल मंसूबों के बीच भारत का मरहम, दवाओं से लेकर इन चीजों में मदद

Fri, 19 Dec 2025 05:13 AM IST
लव गौर परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दवाओं की आपूर्ति, नए अस्पतालों के निर्माण, अत्याधुनिक मशीनों और मेडिकल वीजा में सहयोग से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए। 
 
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ अफगान मंत्री जलाली - फोटो : ANI Photos
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विस्तार
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अफगानिस्तान एक बार फिर क्षेत्रीय शक्तियों की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बना है। एक ओर पाकिस्तान वहां अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश कर रहा है तो दूसरी ओर चीन की नजर अफगानिस्तान के विशाल खनिज संसाधनों और बुनियादी ढांचे पर टिकी है। ऐसे माहौल में भारत ने हथियार या खनिज नहीं, बल्कि मरहम और दवाओं के जरिये अफगानिस्तान में अपनी कूटनीतिक मौजूदगी को मजबूती दी है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के पारंपरिक चिकित्सा पर आधारित दूसरे वैश्विक सम्मेलन में शामिल होने नई दिल्ली आए अफगानिस्तान के कार्यवाहक स्वास्थ्य मंत्री मावलवी नूर जलाल जलाली ने मानवीय सहयोग के लिए भारत से समर्थन मांगा। इस दौरान भारत ने स्पष्ट किया कि उसका जुड़ाव अफगान सत्ता से नहीं, बल्कि अफगान जनता की बुनियादी जरूरतों से है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दवाओं की आपूर्ति, नए अस्पतालों के निर्माण, अत्याधुनिक मशीनों और मेडिकल वीजा में सहयोग से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए। स्वास्थ्य कूटनीतिज्ञ डॉ. अमरेंद्र कुमार का कहना है कि दिल्ली में अफगान स्वास्थ्य मंत्री की मौजूदगी और भारत से मानवीय सहयोग की अपील को बड़े रणनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए।

चार वर्ष में 327 टन दवा, अब काबुल में भारत का अस्पताल
भारत ने पिछले चार वर्षों में अफगानिस्तान को 327 टन से अधिक दवाएं और टीके भेजे हैं। पक्तिया, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में पांच प्रसूति एवं स्वास्थ्य क्लीनिक बनाए गए हैं, जबकि काबुल में 30 बिस्तरों वाला अस्पताल भी तैयार किया गया है। अब भारत अफगानिस्तान को कैंसर की दवाएं और एक अत्याधुनिक सीटी स्कैन मशीन भी उपलब्ध कराएगा। इसकी आपूर्ति इसी महीने के अंत तक की जाएगी।
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शासन नहीं, जनता के लिए संवाद
भारत ने भले ही तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी हो, लेकिन मानवीय आधार पर संवाद और सहयोग का रास्ता खुला रखा है। बैठक में दोनों पक्षों के बीच स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने, दवाओं की आपूर्ति, आधुनिक चिकित्सा उपकरण और क्षमता निर्माण पर सहमति बनी। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में जेपी नड्डा ने स्पष्ट किया कि भारत की नीति हमेशा लोगों की भलाई पर केंद्रित रही है और अफगानिस्तान के मामले में भी यही दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।

आठ माह में 500 मेडिकल वीजा
भारत की मेडिकल डिप्लोमेसी का अहम पहलू मेडिकल वीजा भी है। इस वर्ष अप्रैल से नवंबर के बीच 500 से अधिक अफगान नागरिकों को भारतीय वीजा जारी किए गए, जिनमें 200 से ज्यादा मेडिकल वीजा शामिल हैं। गंभीर और आपात बीमारियों से जूझ रहे अफगान मरीजों को भारत में इलाज की सुविधा देना दोनों देशों के बीच भरोसे का मजबूत सेतु बनता जा रहा है।

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अफगानों के लिए संजीवनी बन रहा भारत: जलाली
बैठक में अफगान स्वास्थ्य मंत्री मावलवी नूर जलाल जलाली ने भारत की मानवीय भूमिका की सराहना की। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक, अफगान मंत्री ने कहा कि काबुल में आयोजित जयपुर फुट शिविर अफगान जनता के लिए भारत की संवेदनशीलता का प्रतीक बनकर सामने आया है, जहां 75 दिव्यांगों को कृत्रिम अंग लगाए गए। जलाली ने भारतीय डॉक्टरों की टीम को अफगानिस्तान भेजने और प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने के प्रस्ताव का स्वागत किया है।
 
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