उत्तरी राज्यों में भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। जिसको देखते हुए भारत ने पाकिस्तान को सतलुज और तवी में बाढ़ की संभावना को लेकर अलर्ट किया है। इससे पहले, भारत ने पिछले हफ्ते पाकिस्तान को तवी नदी में संभावित बाढ़ को लेकर एक के बाद एक तीन चेतावनियां जारी की थीं।
उत्तरी राज्यों में लगातार हो रही बारिश के चलते सतलुज नदी में पानी का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ने की आशंका है। इसी को देखते हुए भारत ने पाकिस्तान को सतलुज और तवी नदी में संभावित बाढ़ की चेतावनी जारी की है। सूत्रों के अनुसार, यह चेतावनी मानवीय आधार पर विदेश मंत्रालय के जरिए इस्लामाबाद को भेजी गई।
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सूत्रों ने बताया कि मंगलवार को जारी अलर्ट में बुधवार को सतलुज में बाढ़ की संभावना जताई गई है। इससे पहले, भारत ने पिछले हफ्ते पाकिस्तान को तवी नदी में संभावित बाढ़ को लेकर एक के बाद एक तीन चेतावनियां जारी की थीं।पंजाब में भारी बारिश से सतलुज, ब्यास और रावी नदियों के साथ मौसमी नदियां भी उफान पर हैं। जलाशयों से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के कारण हालात और गंभीर हो सकते हैं।
सिंधु जल संधि पर भारत ने दिखाई मानवता
भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से सिंधु जल संधि हुई थी। इस संधि के तहत दोनों देशों में जल संसाधनों और नदियों से जुड़े आंकड़े साझा किए जाते थे। हालांकि इस साल 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों के हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने नियमित हाइड्रोलॉजिकल डेटा का आदान-प्रदान रोक दिया था। इसके बावजूद भारत ने इस बार अलर्ट भेजा ताकि पाकिस्तान में जनहानि और संपत्ति का नुकसान रोका जा सके।
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पंजाब और जम्मू में नदियां उफान पर
उत्तरी राज्यों में भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। पंजाब में सतलुज, ब्यास और रावी नदियां तथा कई छोटे-छोटे मौसमी नाले अपने खतरे के स्तर से ऊपर बह रहे हैं। वहीं जम्मू में भी लगातार बारिश ने नदियों को उफना गई हैं।जलस्तर इतना बढ़ गया कि प्रशासन को मजबूर होकर प्रमुख जलाशयों के गेट खोलने पड़े। अधिकारियों ने बताया कि अगर पानी रोका जाता तो बड़े हादसों की आशंका और बढ़ जाती।
मानवीय आधार पर भारत का कदम
भारत ने स्पष्ट किया है कि यह चेतावनी पाकिस्तान को केवल मानवीय दृष्टिकोण से दी गई है। बाढ़ की स्थिति में सीमा पार भी गंभीर नुकसान हो सकता है, इसलिए समय रहते अलर्ट भेजना जरूरी था। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में अगर बारिश का सिलसिला जारी रहा तो स्थिति और बिगड़ सकती है। भारत के इस कदम को सीमा पार आपदा प्रबंधन सहयोग का उदाहरण माना जा रहा है।