केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री (MoS) कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा को एक लिखित उत्तर में बताया कि अमेरिका के साथ F-35 लड़ाकू विमानों पर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है। वे कांग्रेस सांसद बलवंत बसवंत वानखड़े की ओर से पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे, जिन्होंने सैन्य सहायता पर अमेरिका के साथ संबंधों के बारे में सवाल पूछा था।
मंत्री ने लिखित उत्तर में कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान ट्रंप के साथ बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में उल्लेख किया गया था कि अमेरिका भारत को F-35 और अंडरवाटर सिस्टम सौंपने की अपनी नीति की समीक्षा करेगा। हालांकि, इस मुद्दे पर अभी तक कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है।'
'किसी को मध्यस्थता करने की अनुमति नहीं दी गई'
भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रोकने में अमेरिका की भूमिका पर राज्य मंत्री ने कहा कि अमेरिका समेत विभिन्न देशों के साथ कई राजनयिक बातचीत हुई है, लेकिन किसी को मध्यस्थता करने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि सैन्य कार्रवाई रोकने पर चर्चा सीधे भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी। इसकी शुरुआत पाकिस्तान के अनुरोध पर हुई थी।
'पाकिस्तान के अनुरोध पर संघर्ष पर लगाया गया विराम'
उन्होंने कहा, 'अमेरिका के संदर्भ में 9 मई को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को यह बताया गया था कि यदि पाकिस्तान कोई बड़ा हमला करता है तो भारत उचित जवाब देगा। सैन्य कार्रवाई रोकने पर चर्चा भारत और पाकिस्तान के बीच दोनों सशस्त्र बलों के बीच मौजूदा संचार माध्यमों के जरिए सीधे हुई। यह पाकिस्तान के अनुरोध पर शुरू की गई थी।'
'पाकिस्तान के साथ लंबित मुद्दों पर केवल द्विपक्षीय रूप से चर्चा की जाएगी'
जब उनसे भारत और पाकिस्तान के बीच किसी तीसरे की मध्यस्थता को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ लंबित मुद्दों पर केवल द्विपक्षीय रूप से चर्चा की जाएगी। हमारा दीर्घकालिक रुख यह है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी लंबित मुद्दे पर केवल द्विपक्षीय रूप से चर्चा की जाएगी। यह बात सभी देशों को स्पष्ट कर दी गई है।
सरकार ने और क्या कहा?
उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी हमारे नागरिकों के बीच आपसी विश्वास, साझा हितों, सद्भावना और मजबूत जुड़ाव पर आधारित है। इस साझेदारी को बढ़ते रणनीतिक साझेदारी और सहयोग से भी लाभ हुआ है। भारत सरकार, रक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों सहित अपनी सभी बाहरी साझेदारियों का राष्ट्रीय हित और रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति प्रतिबद्धता के दृष्टिकोण से बारीकी से मूल्यांकन करती है।