विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने अमेरिकी कांग्रेस के द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ दिल्ली में हुई बैठक में रूस और ईरान से जुड़े नए अमेरिकी प्रतिबंध कानून के संभावित प्रभावों पर भारत की चिंता सामने रखी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, चर्चा में द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ने वाले असर का मुद्दा उठाया गया।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने अमेरिकी कांग्रेस के द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के दौरान रूस और ईरान पर हाल में लागू हुए प्रतिबंध कानून एसआरआईए के असर को लेकर भारत की चिंता जाहिर की। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपने द्वि-साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि यह बैठक रविवार को दिल्ली में हुई थी। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष ब्रायन मास्ट ने किया।
बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
जायसवाल ने कहा, "बैठक में द्विपक्षीय प्रकृति के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश सचिव ने एसआरआईए कानून को लेकर हमारी चिंताओं से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि इसका द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर किस तरह का प्रभाव पड़ सकता है।"
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' को कानून का रूप दिया है। यह कानून उन्हें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। इनमें चीन और भारत भी शामिल हैं।
भारत-रूस शिखर सम्मेलन पर भी सवाल
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से अगले भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा की संभावित समयसीमा को लेकर भी सवाल किया गया। जायसवाल ने कहा, "रूस के साथ पिछला वार्षिक शिखर सम्मेलन भारत में हुआ था और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मेजबानी करके हमें खुशी हुई थी। अगली बैठक रूस में होगी और अभी इसमें कुछ समय है। इस संबंध में जो भी जानकारी होगी, हम आपको बताते रहेंगे।"
प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 4 और 5 दिसंबर 2025 को भारत की राजकीय यात्रा की थी। इस दौरान 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ था। इस शिखर सम्मेलन से पहले विदेश मंत्रालय ने कहा था कि बैठक का उद्देश्य भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भविष्य की दिशा तय करना है।