भारत और अमेरिका ने रक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। साथ ही द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने पर सहमति जताई।
भारत और अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने व्यापार और निवेश, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। इसमें असैन्य परमाणु सहयोग को मजबूत करना भी शामिल है।
विज्ञापन
'2+2 अंतर-सत्रीय वार्ता' के तहत सोमवार को हुई यह वर्चुअल वार्ता व्यापार और टैरिफ पर ट्रंप प्रशासन की नीतियों को लेकर दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव की पृष्ठभूमि में हुई।
दोनों पक्ष रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए तत्पर
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि दोनों पक्ष रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए तत्पर हैं, जिसमें भारत-अमेरिका प्रमुख रक्षा साझेदारी के लिए एक नए 10 वर्षीय ढांचे पर हस्ताक्षर करना और रक्षा, औद्योगिक, विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग को आगे बढ़ाना शामिल है।
अधिक समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता की पुष्टि की
विदेश मंत्रालय ने कहा, प्रतिभागियों ने 21वीं सदी और उसके बाद के लिए भारत-अमेरिका कॉम्पैक्ट के तत्वावधान में इन क्षेत्रों में हुई प्रगति को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। अध्यक्षों ने क्वाड के जरिये एक सुरक्षित, मजबूत और अधिक समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करेंगे दोनों पक्ष
विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि बैठक के आखिर में दोनों पक्षों ने चर्चा को उपयोगी बताया और यह वादा किया कि वे भारत और अमेरिका के लोगों के भले के लिए द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करेंगे।
भारत-अमेरिका की ओर से बैठक में ये हुए शामिल
इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू काकनूर और रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) विश्वेश नेगी ने की। वहीं, अमेरिका की ओर से इसमें बेथानी पी. मॉरिसन (दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के वरिष्ठ अधिकारी) और जेडीडिया पी. रॉयल (हिंद-प्रशांत सुरक्षा मामलों के कार्यवाहक सहायक रक्षा सचिव) शामिल हुए।