भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन और नई दिल्ली महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) से जुड़े समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब हैं। अगले कुछ महीनों में इस बारे में एक बड़ा एलान हो सकता है।
क्या बोले अमेरिकी राजदूत?
सर्जियो गोर ने एक मीडिया चैनल के कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि यह समझौता आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा प्रणालियों और नई तकनीकों के लिए जरूरी सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने में मदद करेगा। राजदूत ने भरोसा जताया कि भारत और अमेरिका के रिश्ते अब एक ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच अब रुकावटों के बजाय नई उपलब्धियां (ब्रेकथ्रू) देखने को मिल रही हैं।
राजदूत ने भारत-अमेरिका साझेदारी के तीन मुख्य स्तंभों का जिक्र किया। पहला व्यापार में सुधार, दूसरा तकनीक और भरोसे में बढ़ोतरी और तीसरा रणनीतिक तालमेल। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सरकारों में अवसरों को नतीजों में बदलने की पूरी इच्छाशक्ति है। यह साझेदारी केवल टैक्स या बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था के संसाधनों को सुरक्षित करने के बारे में है।
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में क्या?
बता दें कि, भारत और अमेरिका ने सात फरवरी को एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा तैयार की थी। इस समझौते के तहत भारत ने अमेरिका से आने वाले कई सामानों पर टैक्स (टैरिफ) कम करने या हटाने का फैसला लिया है। इसमें अमेरिकी औद्योगिक सामानों के साथ-साथ खेती से जुड़े उत्पाद भी शामिल हैं। अब अमेरिका से आने वाले सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल और शराब जैसे उत्पादों पर भारत कम टैक्स लगाएगा।
बदले में अमेरिका भी भारतीय सामानों पर विशेष व्यवस्था लागू करेगा। अमेरिका ने 2 अप्रैल 2025 के कार्यकारी आदेश के तहत भारतीय सामानों पर 18 प्रतिशत की दर से शुल्क लगाने की बात कही है। इसमें भारत में बने कपड़े, चमड़े के उत्पाद, जूते, प्लास्टिक, रबर, रसायन, घर की सजावट का सामान और कुछ मशीनें शामिल होंगी।
सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्था का आकार और लोगों की प्रतिभा बहुत बड़ी है। अब सही राजनीतिक इच्छाशक्ति की वजह से इस क्षमता का पूरा लाभ मिलना शुरू हो गया है। आने वाले समय में यह साझेदारी दुनिया के लिए एक मिसाल बनेगी।
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