भारत और चीन के संबंधों में मिल रहे शुभ संकेत (फाइल)
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भारत ने चीन से निर्यात नियंत्रण संबंधी लंबित मुद्दों को जल्द हल करने का आह्वान किया है। विदेश मंत्रालय के पूर्वी एशिया प्रभाग के संयुक्त सचिव सुजीत घोष की चीनी उप विदेश मंत्री सन वेइडोंग और चीन के विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के विभाग के महानिदेशक लियू जिनसोंग के बीच बृहस्पतिवार को हुई बातचीत में भारत ने यह आग्रह किया। घोष दो दिन की यात्रा पर चीन गए थे।
विदेश मंत्रालय ने इस बारे में बयान जारी कर कहा कि भारतीय पक्ष ने बातचीत में निर्यात नियंत्रण से संबंधित लंबित मुद्दों के शीघ्र समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर चीन की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर चिंतित है। विदेश मंत्रालय ने कहा, चर्चाएं रचनात्मक और भविष्योन्मुखी रहीं। दोनों पक्षों ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रणनीतिक मार्गदर्शन के महत्व को स्वीकार करते हुए द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और पुनर्जीवित करने में हुई प्रगति का सकारात्मक आकलन किया। इसमें जन-केंद्रित गतिविधियों को प्राथमिकता दी गई। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि दोनों पक्षों ने आगामी वर्ष की आदान-प्रदान योजनाओं और गतिविधियों की समीक्षा की।
इस मुलाकात के बारे में चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बैठक में तय समझौतों को पूरी तरह लागू करने की प्रतिद्धता जताई गई। चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, दोनों पक्षों ने चीन-भारत संबंधों में हाल ही में हुई सकारात्मक प्रगति की पुष्टि की।
समझौतों को प्रभावी ढंग से लागू करेंगे
घोष की चीन के उप विदेश मंत्री से मुलाकात के दौरान सन ने उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष अपने नेताओं के बीच हुए महत्वपूर्ण साझा समझौतों को प्रभावी ढंग से लागू करेंगे। दोनों पक्ष आपसी संबंधों में एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाएंगे, भरोसे का निर्माण करने के लिए ठोस प्रयास करेंगे, सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर काम करेंगे, एक-दूसरे का सम्मान करेंगे, मतभेदों का उचित प्रबंधन करेंगे और चीन-भारत संबंधों के निरंतर विकास को बढ़ावा देंगे।
विकास की गति को मजबूती देंगे
घोष ने इस बारे में कहा कि भारत-चीन संबंध बहुत महत्वपूर्ण हैं और भारत दोनों देशों के नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन में चीन के साथ मिलकर संस्थागत संवाद को फिर से शुरू करने, आदान-प्रदान और सहयोग को मजबूत करने और भारत-चीन संबंधों के विकास की गति को मजबूती देने के लिए तत्पर है।