भारत ने कम समय के लिए देश का दौरा करने वाले चीनी पेशेवरों के लिए व्यावसायिक वीजा की जल्द स्वीकृति सुनिश्चित करने के लिए नियमों में बदलाव किए हैं। यह कदम पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच तनावपूर्ण हो चुके रिश्तों को फिर से मजबूत करने की कोशिशों के बीच उठाया गया है।
हालांकि, मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने शुक्रवार को बताया कि सभी चीनी वीजा आवेदकों की मौजूदा जांच प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। गौरतलब है कि पहले कम समय के लिए भारत आने वाले चीनी पेशेवरों को छह महीने या उससे ज्यादा की वैधता वाले रोजगार वीजा या 'ई' वीजा जारी किए जाते थे।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि अब उन्हें कम अवधि के लिए वैध व्यावसायिक वीजा देने का निर्णय लिया गया है। नियमों में किए गए ये बदलाव मोटे तौर पर सभी देशों के वीजा आवेदकों पर लागू होंगे, लेकिन चीनी नागरिकों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।
सूत्रों के अनुसार, व्यावसायिक वीजा के लिए सभी आवेदनों पर तीन से चार सप्ताह की अवधि के भीतर कार्रवाई की जाएगी। नई दिल्ली के इस फैसले से चीनी विशेषज्ञों को भारत आने और विभिन्न क्षेत्रों में चीनी उपकरणों और मशीनों का उपयोग करने वाली कंपनियों को तकनीकी सहायता प्रदान करने में मदद मिलने की संभावना है।
भारत और चीन के विदेश मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने बीजिंग में परामर्श का एक नया दौर आयोजित किया, जिसमें अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बैठक के बाद द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक प्रगति की पुष्टि की गई।
चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक विदेश मंत्रालय के पूर्वी एशिया प्रभाग के संयुक्त सचिव सुजीत घोष और चीनी विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के विभाग के महानिदेशक लियू जिनसोंग ने गुरुवार को परामर्श किया।
इसमें कहा गया है कि दोनों पक्षों ने चीन-भारत संबंधों में हाल ही में हुई सकारात्मक प्रगति की पुष्टि की और अगस्त में तियानजिन में हुई मुलाकात के दौरान पीएम मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच हुए महत्वपूर्ण साझा समझौतों को पूरी तरह से लागू करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
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