धरती के बढ़ते तापमान को कम करने के लिए 50 देशों के साथ पहले ही पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर कर चुका भारत इसे महात्मा गांधी के जन्म दिवस पर स्वीकार कर लेगा। भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आशय की घोषणा की। दीनदयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी समारेाह की घोषणा करने के बाद पीएम मोदी ने कहा, ‘दुनिया अब पर्यावरण पर पड़ रहे दुष्प्रभाव से चिंतित है। कॉप-21 (कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज) का एक काम अभी बाकी है। इसके समझौते को अभी तक स्वीकार नहीं किया जा सका है और भारत भी इसे अपनाने की तैयारी में है। आज दीनदयाल उपाध्याय की जन्मशती है और मैं घोषणा करता हूं कि भारत महात्मा गांधी के जन्मदिवस पर 2 अक्टूबर से कॉप-21 के फैसले को लागू कर देगा।
इस देश के बीती सदी के दो महान विचारकों महात्मा गांधी और दीनदयाल उपाध्याय ने दुनिया को इस मामले में खबरदार किया था। पीएम ने कहा कि रविवार को दीनदयालजी के जन्म शताब्दी समारोह की शुरुआत हुई है, जबकि दो अक्टूबर को राष्ट्रपिता का जन्म दिन है जिनका जीवन न्यूनतम कार्बन फुटप्रिंट की मिसाल रहा है। इसलिए वह पेरिस जलवायु समझौते को स्वीकार करने की तारीख की घोषणा दीनदयालजी के सौवें जन्म दिवस पर पर कर रहे हैं, जबकि इसे राष्ट्रपिता के जन्मदिन पर स्वीकार किया जाएगा।’
कॉप-21 के फैसले स्वीकार करने की जरूरत पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण कई तटीय देशों और शहरों पर खतरा बढ़ रहा है। यहां तक कि तटीय क्षेत्र होने के नाते केरल पर भी इसका खतरा मंडरा रहा है।
190 देशों ने जताई थी सहमति
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दिसंबर में जलवायु परिवर्तन पर हुए पेरिस सम्मेलन के दौरान भारत की पहल पर 190 से अधिक देशों ने ग्लोबल वार्मिंग पर काबू पाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर सहमति जताई थी और जलवायु परिवर्तन का दुष्परिणाम झेल रहे गरीब देशों के लिए खरबों डॉलर खर्च करने का वादा किया था। वैश्विक स्तर पर 55 प्रतिशत ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित करने वाले कम से कम 55 देशों द्वारा स्वीकार करने के बाद कॉप-21 (कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज) समझौता लागू हो जाएगा। अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश इस समझौते को यथाशीघ्र अमल करने का समर्थन कर रहे हैं, वहीं भारत इसे राष्ट्रीय प्रक्रिया में शामिल करने के लिए ज्यादा वक्त की मांग कर रहा है क्योंकि इसे लगता है कि जल्दबाजी में किया गया कोई फैसला इसकी विकास परियोजनाओं को प्रभावित कर सकता है।
पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौता-2015 की खास बातें
1. 30 नवंबर से 12 दिसंबर 2015 तक चला था पेरिस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन।
2. जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में समझौते के अंतिम मसौदे को भारत, चीन और अमेरिका समेत 196 देशों ने मंजूरी दी थी।
3. सभी देश कार्बन उत्सर्जन में जल्द से जल्द कमी लाने को हुए सहमत।
4. ग्रीन हाउस गैसों और उनके स्रोत के बीच 2020 तक संतुलन बनाए जाने पर बनी सहमति।
5. वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस पर सीमित करने की कोशिश का लक्ष्य रखा गया था।
6. हर पांच साल में इस दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
7. 2020 तक कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए विकासशील देशों को हर साल 100 अरब डॉलर की मदद दी जाने की बात की गई।
पेरिस समझौते पर भारत के कदम को अमेरिका ने सराहा
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अमेरिका ने भारत की ओर से 2 अक्तूबर से ही जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता स्वीकार करने के कदम की सराहना की है। भारत में अमेरिका राजदूत रिचर्ड वर्मा ने रविवार को ट्वीट कर कहा, ‘हम इस खबर का स्वागत करते हैं जिसमें भारत ने 2 अक्टूबर से पेरिस समझौते पर अमल करने की घोषणा की है। जलवायु परिवर्तन पर हुए समझौते का समर्थन करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई।’ गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन के समझौते पर 2 अक्तूबर से अमल करने का एलान करते हुए एक अभूतपूर्व कदम उठाया है।
पेरिस जलवायु करार पर भारत की मुहर बड़ा कदम : दवे
पेरिस में जलवायु करार पर भारत 2 अक्टूबर को अपनी मुहर लगा देगा। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल दवे ने इसे जलवायु परिवर्तन एक बड़ा कदम बताया और कहा है कि इससे दुनिया भर में भारी परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री ने इसकी घोषणा कर सबको चौंका दिया। दवे ने कहा कि उनका विश्वास है कि भारत ने विश्व मंच पर एक बड़ा कदम उठाया है।