भारत सरकार ने देश की पहली व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति एवं रणनीति 'प्रहार' को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है। गृह मंत्रालय ने बुधवार को संसद को बताया कि इस रणनीति का उद्देश्य आतंकवादी गतिविधियों और कट्टरपंथ से निपटने के लिए सरकार और समाज, दोनों के स्तर पर समन्वित व्यवस्था तैयार करना है।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में कुछ सांसदों के सवालों के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। 'प्रहार' को इसी साल 23 फरवरी को पेश किया गया था।
गृह मंत्रालय के अनुसार, प्रहार सात प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इनमें आतंकवादी हमलों की रोकथाम, खतरे के अनुरूप तेज और संतुलित प्रतिक्रिया, सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल, मानवाधिकार और कानून के शासन पर आधारित प्रक्रिया शामिल हैं। इसके अलावा आतंकवाद के लिए अनुकूल परिस्थितियों और कट्टरपंथ को कम करना, आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को मजबूत करना तथा पूरे समाज की भागीदारी के जरिए रिकवरी और मजबूती बढ़ाना भी रणनीति का हिस्सा है।
नित्यानंद राय ने बताया कि प्रहार एक व्यापक और खुफिया जानकारी आधारित सक्रिय ढांचे के तहत आतंकवाद-रोधी उद्देश्यों को संबोधित करती है। इसके तहत मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के माध्यम से रियल टाइम इंटेलिजेंस साझा करने को औपचारिक रूप देने, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और राज्य की एजेंसियों तथा पुलिस के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) जैसी केंद्रीय विशेष बलों के बीच तेज और समन्वित कमांड व्यवस्था पर जोर दिया जाएगा।
सरकार के अनुसार, प्रहार में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ कानून के शासन और मानवाधिकारों का सख्ती से पालन किया जाएगा। कट्टरपंथ को रोकने के लिए समुदाय की भागीदारी वाले मॉड्यूल लागू करने की भी बात कही गई है। रणनीति के तहत आतंकवाद के वित्तपोषण पर भी कार्रवाई की जाएगी। इसमें क्रिप्टो वॉलेट की निगरानी, डार्क वेब के जरिए फंड जुटाने पर रोक और केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से संपत्तियों की जब्ती जैसे कदम शामिल हैं। नित्यानंद राय ने कहा कि प्रहार वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) के मानकों के अनुरूप है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय संधियों का इस्तेमाल सीमा पार राज्य-प्रायोजित आतंकवाद के वित्तपोषण वाले नेटवर्क को रोकने के लिए किया जाएगा।
सरकार ने कहा है कि रणनीति को एक साथ पूरी तरह लागू करने के बजाय प्रगतिशील और चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। शुरुआत में संस्थागत और सिस्टम इंटीग्रेशन को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि प्रदर्शन के परिणामों का आकलन कई स्तरों वाली निगरानी व्यवस्था के जरिए किया जाएगा। नियमित निगरानी और मूल्यांकन के अलावा गृह मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से वार्षिक ‘एंटी-टेरर कॉन्फ्रेंस’ भी आयोजित की जाती है। यह सम्मेलन आतंकवाद-रोधी रणनीति की समीक्षा और उसे मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम करता है।