2023 में भारत जिस आधार पर विदेशी निवेश को आकर्षित कर सकता है उनमें कारोबार करने में आसानी, प्राकृतिक संसाधन, उदार एफडीआई नीतियों, विशाल घरेलू बाजार और स्वस्थ जीडीपी विकास की संभावनाओं को बढ़ावा देने जैसे कारक हों सकते हैं।
भारत 2023 में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएं शुरू कर और स्वस्थ आर्थिक विकास के अनुमान जैसे उपायों के कारण विदेशी निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर सकता है। हालांकि कठोर मौद्रिक नीति के कारण वैश्विक आर्थिक स्थितियों में काफी अनिश्चितताएं हैं। साथ ही अमेरिका में ब्याज दरों के लगातार ऊपर जाने और जारी रूस-यूक्रेन युद्ध चिंता का कारण बना रह सकता है।
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अभी भी कई चिंताजनक बिंदु हैं
2023 में भारत जिस आधार पर विदेशी निवेश को आकर्षित कर सकता है उनमें कारोबार करने में आसानी, प्राकृतिक संसाधन, उदार एफडीआई नीतियों, विशाल घरेलू बाजार और स्वस्थ जीडीपी विकास की संभावनाओं को बढ़ावा देने जैसे कारक हों सकते हैं। हालांकि, अनुबंधों के प्रवर्तन में देरी, बोझिल प्रक्रियाएं और उच्च ब्याज दरें अभी भी चिंताजनक बिंदु हैं।
2022 में अब तक अच्छा एफडीआई
भारत ने 2022 में अब तक अच्छा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त किया है। आंकड़ों के अनुसार, भारत को जनवरी-सितंबर 2022 के दौरान 42.5 अरब डॉलर का विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है। यह 2021 में 51.3 अरब डॉलर था। 2021-22 में 84.84 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निवेश आया था। हालांकि, इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल-सितंबर की अवधि के दौरान भारत में एफडीआई इक्विटी प्रवाह 14 प्रतिशत घटकर 26.9 अरब डॉलर रह गया।
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भारत पसंदीदा निवेश देश
कुल एफडीआई प्रवाह (जिसमें इक्विटी और अन्य पूंजी शामिल है) भी इस वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान घटकर 39 बिलियन डॉलर रह गया, जबकि एक साल पहले की अवधि में यह 42.86 बिलियन डॉलर था। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग में सचिव अनुराग जैन ने कहा कि एफडीआई नीति में उदारीकरण, उद्योग के लिए अनुपालन बोझ को कम करने जैसे उपायों के कारण भारत पसंदीदा निवेश देश है।