चीन की राजधानी बीजिंग से लेकर पाकिस्तान के सभी शहरों को अपनी जद में लेने की क्षमता रखने वाली स्वदेश निर्मित के-4 बैलेस्टिक मिसाइल के पनडुब्बी संस्करण का पिछले छह दिनों में दूसरी बार सफल परीक्षण किया गया। रक्षा सूत्रों के मुताबिक भारत ने विशाखापट्टनम के तट से 3500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। डीआरडीओ द्वारा विकसित इस मिसाइल को पानी के नीचे के प्लेटफॉर्म से शुक्रवार सुबह परीक्षण किया।
बता दें कि इससे पहले रविवार को 3500 किलोमीटर दूरी तक मार करने वाली इस मध्यवर्ती मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया था। यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। इस परीक्षण की सफलता के साथ ही भारतीय सेना की पनडुब्बी से दुश्मनों के ठिकानों पर मिसाइल दागने की क्षमता और मजबूत हो गई है।
अरिहंत पर किया जाएगा तैनात
इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया है। इसे स्वदेश में निर्मित अरिहंत क्लास की परमाणु पनडुब्बियों के बेड़े पर तैनात किया जाएगा। परमाणु पनडुब्बी पर तैनात किए जाने से पहले इस मिसाइल के अभी कई और परीक्षण किए जाएंगे। फिलहाल भारत के पास आईएनएस अरिहंत के रूप में स्वदेशी तौर पर विकसित एक ही परमाणु पनडुब्बी है, जबकि एक अन्य परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिघात के जल्द शामिल होने की संभावना है।
दुनिया के छह देशों में है भारत
भारत जमीन, हवा और पानी के अंदर से परमाणु मिसाइल को दागने की क्षमता रखने वाले दुनिया के महज छह देशों में शामिल है। भारत के अलावा यह क्षमता अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन के ही पास है।
ऐसी है के-4 मिसाइल
- 3500 किलोमीटर तक कर सकती है हमला
- 12 मीटर है इस मिसाइल की लंबाई
- 1.3 मीटर है के-4 मिसाइल की गोलाई
- मिसाइल का वजन 17 टन है
- 2000 किलो तक के हथियार ले जाने में सक्षम
- 20 मीटर गहरे पानी में लॉन्चर से भी छोड़ सकते हैं
यह हैं खासियत
सूत्रों के मुताबिक, के-4 मिसाइल में बूस्टर ग्लॉराइड फ्लाइट प्रोफाइल्सी तकनीक है। इसकी मदद से यह किसी भी एंटी बैलेस्टिक मिसाइल सिस्टम को चकमा दे सकती है। इसके नेविगेशन सिस्टम में सैटेलाइट अपडेट की भी सुविधा है। इसके चलते यह लक्ष्य को पूरी सटीकता से भेदती है।