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West Bengal: वायुसेना के दो रणनीतिक बेसों के विस्तार को हरी झंडी, सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा होगी अभेद्य

Tue, 23 Jun 2026 06:43 AM IST
Devesh Tripathi आशुतोष भाटिया, नई दिल्ली।

सार

पश्चिम बंगाल सरकार ने भारतीय वायुसेना की रणनीतिक क्षमता बढ़ाने के लिए हाशिमारा और कलाईकुंडा एयरफोर्स स्टेशनों को अतिरिक्त भूमि देने का निर्णय लिया है। यह कदम पूर्वी क्षेत्र में सैन्य बुनियादी ढांचे के विस्तार और आधुनिकीकरण को गति देगा। हाशिमारा में तैनात राफेल लड़ाकू विमानों और आधुनिक रक्षा प्रणालियों के लिए अतिरिक्त सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी, जबकि कलाईकुंडा की भूमिका पूर्वोत्तर सीमाओं और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में निगरानी व समर्थन को मजबूत करेगी।

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पश्चिम बंगाल में दो वायुसेना बेसों का होगा विस्तार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
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वायुसेना की परिचालन क्षमताएं मजबूत करने के लिए दो सबसे संवेदनशील और रणनीतिक एयरफोर्स स्टेशनों हाशिमारा और कलाईकुंडा को कुल 62 एकड़ अतिरिक्त भूमि आवंटित करने का फैसला किया गया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने सोमवार को पेश नए बजट में रक्षा के दृष्टिकोण से इस बेहद दूरगामी फैसले का एलान किया।
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इसके तहत, अलीपुरद्वार जिले में स्थित हाशिमारा एयरफोर्स स्टेशन को 25 एकड़ व पश्चिम मेदिनीपुर के कलाईकुंडा एयरफोर्स स्टेशन को 37 एकड़ जमीन सौंपी जाएगी। इस फैसले से पूर्वी थिएटर में चीन के खिलाफ सैन्य उपस्थिति मजबूत होगी। पिछले कुछ समय में सेना और वायुसेना ने देश के सबसे संवेदनशील हिस्से सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आसपास अपनी रणनीति आक्रामक तेज की है।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर की क्या है अहमियत?
चिकन नेक कहलाने वाला यह मात्र 22 किलोमीटर चौड़ा कॉरिडोर पूर्वोत्तर से भारत की मुख्यभूमि को जोड़ता है। युद्ध की स्थिति में दुश्मनों की नजर इस संकरे हिस्से को काटने पर रह सकती है। हाल ही में सेना ने चिकन नेक के करीब तीन नए अग्रिम अड्डे स्थापित किए थे। अब वायुसेना के इन दो अड्डों के विस्तार के लिए जमीन मिलना यह साफ करता है कि भारत इस पूरे थिएटर में अग्रिम मोर्चे पर तैयारियों पर ध्यान दे रहा है।
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क्यों जरूरी थी जमीन?
हाशिमारा एयरफोर्स स्टेशन पर वायुसेना के सबसे घातक राफेल विमानों की एक स्क्वॉड्रन तैनात है। भूटान और चीन सीमा के त्रिकोण के करीब स्थित हाशिमारा सिलीगुड़ी कॉरिडोर का हवाई सुरक्षा कवच माना जाता है। राफेल आने के बाद से यहां उन्नत मिसाइल प्रणालियों के भंडारण, आधुनिक राडार नेटवर्क और हैंगर के लिए ज्यादा जगह की दरकार थी। वहीं, कलाईकुंडा एयरफोर्स स्टेशन पूर्वी लद्दाख और सिक्किम क्षेत्र को बैकअप देता है। साथ ही बंगाल की खाड़ी में बढ़ती चीनी नौसैनिक गतिविधियों की निगरानी में इसकी भूमिका अहम मानी जाती है। इस बेस को दी गई 37 एकड़ जमीन पूरी तरह सैन्य उपयोग के लिए है।

अटकी थीं वायुसेना परियोजनाएं
जमीन राज्य सूची का विषय होने के कारण ये परियोजनाएं कुछ वर्षों से लंबित थीं। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बनी नई सरकार ने सैन्य जरूरतों को प्राथमिकता दी है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा पर केंद्र के साथ बेहतर तालमेल दर्शाता है। चीन भी एलएसी के पास एयरबेसों का आधुनिकीकरण कर रहा है। लिहाजा भारत के लिए भी पूर्वी थिएटर में आधुनिकीकरण बेहद जरूरी था।
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