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लगातार काटे जा रहे जंगल, फिर भी आजादी के बाद से अब तक नहीं बदला भारत के वन भूमि का आंकड़ा

Sat, 04 May 2019 01:02 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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अगर सवाल यह हो कि भारत का कितने फीसदी हिस्सा वनों से भरा हुआ है...? तो शायद हम सभी का उत्तर 20 फीसदी ही हो। क्योंकि, आजादी के बाद से इस आंकड़े में कभी भी बदलाव किया ही नहीं गया है। इतने समय में भारत की आबादी तीन गुना से ज्यादा बढ़ गई है।
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दरअसल कुछ दिन पहले फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) की ओर से जारी द इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट-2017 में कई दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं। जो हैरानी भी पैदा कर रहे हैं। 

12 साल में पहली बार 'घने जंगलों' में 5,198 वर्ग किमी की बढ़ोत्तरी हुई है। यहां घने जंगल का मतलब 70 फीसदी या उससे ज्यादा घनी ट्री कैनोपी और सामान्य घने जंगलों यानी 40 फीसदी से ज्यादा और 70 फीसदी से कम घनी ट्री कैनोपी से है। 
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2015 के बाद से भारत की वन भूमि में 6600 वर्ग किमी मतलब 0.21 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। चार दशकों में घने जंगलों का विस्तार 49,105 वर्ग किमी में हुआ है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) ने साल 1987 में अपनी पहली रिपोर्ट प्रकाशित की थी। तब से अब तक भारत की वन भूमि में 67454 वर्ग किमी की बढ़ोत्तरी हुई है।

सर्वे पर उठे ये सवाल

घना जंगल
आजादी के बाद से भारत की वन भूमि में बदलाव न होना इस सर्वे पर सवाल खड़ा कर रही है। क्योंकि इस दौरान देश की जनसंख्या में तीन गुना से ज्यादा की वृद्धि हुई है। आज जब हर तरफ पेड़ों को काटा जा रहा है तब वन भूमि का ग्राफ कम क्यों नहीं हो रहा। मैपिंग के पैटर्न को क्यों बदला गया।

यह है नए मैपिंग की विधि

शुरुआत में सैटेलाइट तस्वीरों से 4 वर्ग किलोमीटर से बड़े भूभाग की ही मैपिंग की जाती थी। तब, जिनका आकार 4 वर्ग किमी से कम होता था वे छूट जाते थे। अब संशोधित पैमाने के जरिए छोटे से छोटे भूभागों यहां तक कि एक हेक्टेयर जमीन को भी वनभूमि वाले इलाके में गिना जा सकता है।

अब 10 प्रतिशत कैनोपी डेनसिटी वाले भूभाग को भी 'जंगल' का दर्जा दे दिया गया है। पहले ऐसा नहीं था। इसका सीधा फायदा यह हुआ है कि पहले हुए सर्वे में जो आंकड़े छूट जाते थे उन्हें अब गिना जाने लगा है। फिर भी वन भूमि को बढ़ाने के लिए हमें ज्यादा मात्रा में पौधों को लगाना होगा। 
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भारत में बन रहा है एशिया का सबसे बड़ा संरक्षित वन क्षेत्र

प्रतीकात्मक तस्वीर
2012 में कर्नाटक ने करीब 2600 वर्ग किलोमीटर में फैले वन क्षेत्र को संरक्षित घोषित किया तभी से नेशनल पार्कों, बाघ संरक्षित क्षेत्रों और अभ्यारण्यों को जोड़ा जा रहा है। यह संरक्षित क्षेत्र भारत के कुल भू-क्षेत्र का पांच प्रतिशत है और ऐसे कड़े कानूनों के अंतर्गत आता है जो भूमि के इस्तेमाल को बदलने की प्रक्रिया को मुश्किल बनाते हैं। भारत में नेशनल पार्कों और टाइगर रिजर्व में लोगों के रहने की अनुमति नहीं है।

जानिए फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया को

फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI), केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय के तहत एक प्रमुख राष्ट्रीय संगठन है, जो नियमित रूप से देश के वन संसाधनों के मूल्यांकन और निगरानी के लिए जिम्मेदार है। इसके अलावा यह संगठन प्रशिक्षण, अनुसंधान और विस्तार की सेवाएं प्रदान करने के काम में भी लगा हुआ है। इस संगठन की स्थापना 1 जून 1981 को हुई थी। 
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