उड़ी हमले के बाद भारत में सिंधु समझौता रद्द करने की चर्चा रही। इसकी शिकायत पाकिस्तान ने वर्ल्ड बैंक से की थी। इसके बाद वर्ल्ड बैंक ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (सीओए) बनाई है, जिस पर भारत ने कड़ा ऐतराज जताया है।
वर्ल्ड बैंक ने गुरुवार की देर रात दोनों देशों में मध्यस्थता के लिए कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन और एक न्यूट्रल एक्सपर्ट नियुक्त किया। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पर कानूनी तौर पर एतराज जताया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने किशनगंगा और रतले प्रोजेक्ट पर वर्ल्ड बैंक के इस कदम पर ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि वे इस फैसले को कानूनन अस्वीकार करार देते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड बैंक ने एक सामानांतर व्यवस्था बनाई है, जिसके से भारत नहीं चल सकता।
उन्होंने कहा कि वह किसी भी ऐसी व्यवस्था का हिस्सा नहीं बन सकते, जोकि सिंधु जलसमझौते के हिसाब से नहीं है। विकास स्वरूप ने कहा कि ये मामला न्यूट्रल टेक्निकल एक्सपर्ट के दायरे में जाता है। सिंधु समझौते में वर्ल्ड बैंक भी एक पार्टी है।