51 साल के सोनम वांगचुक ने 19 साल की उम्र में पहली बार समाजसेवा शुरू की थी, जब उन्होंने श्रीनगर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेकभनोलॉजी में इंजीनियरिंग छात्र के तौर पर पढ़ते हुए ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। इसके जरिए उन्होंने इंस्टीट्यूट के लिए अपनी फीस जुटाने के साथ ही बिना तैयारी के नेशनल कॉलेज मैट्रिकुलेशन एग्जाम उत्तीर्ण करने वाले अन्य छात्रों की मदद भी करते थे।
वर्ष 1988 में इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद उन्होंने स्टूडेंट्स एजुकेशन एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (एसईसीएमओएल) की स्थापना की और दूरस्थ सुनसान क्षेत्रों के ऐसे लद्दाखी छात्रों को कोचिंग देना शुरू किया, जो सरकारी परीक्षाओं में फेल हो जा रहे थे। वर्ष 1994 में उन्होंने ऑपरेशन न्यू होप के नाम से शैक्षिक सुधार कार्यक्रम शुरू किया, जिसके यूनिक सिस्टम और समुदाय से जुड़ाव के लिए वांगचुक को पहचाना जाता है।