भारत ने गुरुवार को दिल्ली हिंसा पर इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के बयान को लेकर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि संगठन का बयान तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ओआईसी से आग्रह किया है कि इतने संवेदनशील समय में वह इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान ना दें।
गौरतलब हो कि ओआईसी ने एक बयान में कहा था कि संगठन भारत में मुसलमानों के खिलाफ हाल में हुई खतरनाक हिंसा की निंदा करता है। जिसमें निर्दोष लोगों की जान गंवानी पड़ी और मुस्लिम स्वामित्व वाली संपत्तियों और मस्जिदों में आगजनी और बर्बरता हुई। हिंसा को जघन्य करार देते हुए, संगठन ने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।
कोरोनावायरस से प्रभावित वुहान और जापान के जहाज पर फंसे भारतीयों को वापस लाने पर बोलते हुए प्रवक्ता ने कहा कि हमनें दो विशेष विमानों से आज सुबह 195 भारतीयों और 41 विदेशी नागरिकों को चीन के वुहान और जापान से बाहर निकाला है। अभी तक चीन और जापान से 842 भारतीयों और 48 विदेशी नागरिकों को बाहर निकाला गया है।
रवीश कुमार से जब पूछा गया कि म्यांमार के राष्ट्रपति यू विन मिंट के भारत दौरे पर क्या म्यांमार के राष्ट्रपति और पीएम मोदी के बीच रोहिंग्या मुद्दे पर चर्चा की गई थी। इस पर प्रवक्ता ने कहा कि यदि आप हस्ताक्षर किए गए एमओयू की संख्या को देखते हैं, तो कम से कम चार से पांच समझौता ज्ञापन हैं जो वास्तव में रखाइन राज्य का सामाजिक-आर्थिक विकास संबंधित हैं, तो इस बात पर बहुत चर्चा हुई कि भारत म्यांमार के उस क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास का समर्थन कैसे कर सकता है।