भारत और सिशेल्स ने शनिवार को एक संशोधित समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस संशोधित समझौते के तहत इस द्वीप पर सैन्य सुविधाओं का विकास, प्रबंधन, संचालन और रखरखाव किया जाएगा। इस समझौते को रक्षा मंत्रालय के सचिव एस. जयशंकर और सिशेल्स के सेक्रेटरी बैरी फॉरे ने साइन किया। यह एग्रीमेंट उस समय साइन किया गया है जब इस द्वीप में चीन लगतार उच्च स्तरीय दौरा कर रहा है। इसके अलावा चीन ने डिजिबाउटी में एक नौसेना अड्डा बनाया है।
इस समझौते के बाद भारत समुद्र के रास्ते से चीन पर पैनी नजर रख पाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया- इस समझौते के सामरिक महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हिंद महासागर के जल में एक संतुलन बनाए जाने की आवश्यकता है। समझौता साइन करने के मौके पर विदेश सचिव जयशंकर ने समुद्री रक्षा के महत्व को दोहराया। इस मामले पर भारत और आसियन देशों के बीच 25 जनवरी को हुई वार्ता में भी बात की गई थी।
असली समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सिशेल्स के राष्ट्रपति के बीच मार्च 2015 में हुआ था। जिसके तहत इस द्वीप पर सैन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाना था। मगर इसे लेकर सिशेल्स की संसद में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। इसी वजह से अक्टूबर 2017 में समझौतों में आ रही मुश्किलों को दूर करने के लिए जयशंकर एक अघोषित यात्रा पर गए थे। इसके अलावा सेशेल्स-चीन के बीच सहयोग तेजी से बढ़ रहा है।
बता दें कि भारत और सिशेल्स के बीच गहरी दोस्ती है और इसकी भू-रणनीतिक स्थिति को देखते हुए भारत के लिए यह काफी महत्वपूर्ण था कि वो सिशेल्स के साथ इस संशोधित समझौते पर सहमति बनाए। विदेश सचिव ने कहा कि सिशेल्स का 1.3 मिलियन वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र विशेष रूप से कमजोर है। दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को लेकर बात करते हुए उन्होंने सिशेल्स को याद दिलाया कि कैसे भारत चार दशक पहले उसके संप्रभु राष्ट्र बनने का गवाह रहा है।