विश्व की दो दिग्गज अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका व चीन के बीच चल रही ट्रेड वॉर का खामियाजा भारत समेत एशिया की अन्य अर्थव्यवस्थाओं को उठाना पड़ सकता है। इन दोनों के बीच आयात शुल्क को लेकर जैसे को तैसा की नीति अपनाए जाने के कारण भारत, ताइवान, दक्षिण कोरिया और मलेशिया के निर्यात को करारा झटका लग सकता है, जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर वस्तुओं का निर्यात करते हैं।
दूसरी तरफ, विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे बड़ा खतरा भारत के इस्पात उद्योग के लिए बढ़ गया है, क्योंकि अमेरिका की तरफ से इस्पात पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बाद दुनिया की दिग्गज इस्पात कंपनियां भारत का रुख करते हुए यहां पर इस्पात का निर्यात बढ़ा सकती हैं। इससे भारतीय इस्पात के दाम अचानक बेहद सस्ते हो सकते हैं। इससे जहां आम जनता को लाभ होगा और इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योग को गति मिल सकती है, लेकिन भारतीय इस्पात कंपनियों का मुनाफा बड़े पैमाने पर खत्म हो सकता है।
भारतीय इस्पात संघ के महासचिव भास्कर चटर्जी ने इस बात का अंदेशा जताया है। भारतीय इस्पात उद्योग के एक दिग्गज का आकलन है कि वैश्विक स्तर पर निर्यात किए जाने वाला करीब 17 फीसदी इस्पात भारत आ सकता है। इसके करीब 800 लाख टन होने की संभावना है।
अन्य देशों ने इस खतरे से निपटने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। यूरोपीय संघ अपने यहां के करीब 15 अरब रुपये के कारोबार को बचाने के लिए प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है, जबकि कनाडा की सरकार ने भी इस्पात पर आयात शुल्क बढ़ाने की तैयारी कर ली है। लेकिन भारत सरकार ने अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है।