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UN Peacekeeping Mission: संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन में क्या है भारत की भूमिका, कितना पुराना है इतिहास?

Thu, 28 Jul 2022 06:49 PM IST
जयदेव सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बीएसएफ के मुताबिक बुटेम्बो में मंगलवार को विरोध प्रदर्शन हो रहा था। ये प्रदर्शन संयुक्त राष्ट्र मिशन मोनुस्को (United Nations Organization Stabilization Mission in the Democratic Republic of the Congo) के खिलाफ किया जा रहा था।
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संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में इस वक्त भारत के साढ़े पांच हजार से ज्यादा जवान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन का हिस्सा रहे पांच जवान मंगलवार को शहीद हो गए। इनमें बीएसफ के दो जवान भी शामिल थे। ये घटना तब हुई जब ये जवान युगांडा के साथ लगती सीमा के पास एक पूर्वी शहर में विरोध प्रदर्शन जारी थे। 

ये घटना कैसे हुई? कांगों में कितने भारतीय सैनिक तैनात हैं? क्या पहले भी शांति मिशन में शामिल भारतीय सैनिक शहीद हुए हैं? संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भारत का क्या योगदान रहा है? आइये जानते हैं…

ये घटना कैसे हुई? 

बीएसएफ के मुताबिक बुटेम्बो में मंगलवार को विरोध प्रदर्शन हो रहा था। ये प्रदर्शन संयुक्त राष्ट्र मिशन मोनुस्को (United Nations Organization Stabilization Mission in the Democratic Republic of the Congo) के खिलाफ किया जा रहा था। प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त राष्ट्र के खिलाफ एक हफ्ते का विरोध बुला रखा था। 

विद्रोहियों ने सोमवार को भी भारतीय सेना परिचालन ठिकानों, अस्पताल में लूटपाट की कोशिश की थी। हालांकि, शांति सैनिकों ने संयुक्त राष्ट्र के आदेश और नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई करके लूट के प्रयासों को विफल कर दिया। दो महीने पहले भी भारतीय सेना के जवानों पर विद्रोहियों ने हमला किया था। 22 मई को हुए हमले में विद्रोहियों ने संयुक्त राष्ट्र और कांगो आर्मी के ठिकाने पर कब्जा करने की कोशिश की थी। लेकिन जैसे ही हमला हुआ था भारतीय सेना के जवानों ने डटकर जवाब देते हुए विद्रोहियों को खदेड़ दिया था। 

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कांगो में दो जवान शहीद - फोटो : Social Media

कांगों में कितने भारतीय सैनिक तैनात हैं?

कांगो बीते कई वर्षों से गृहयुद्ध की मार झेल रहा है। देश में शांति स्थापित करने के प्रयासों के तहत संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना यहां तैनात है। कांगो में 1999 से ही भारतीय सेना की टुकड़ी तैनात है। कांगो में इस समय दुनिया की सबसे बड़ी शांति सेना तैनात है। यहां अलग -अलग देशों से करीब 20 हजार सैनिक तैनात हैं। भारतीय सेना के अधिकारियों के मुताबिक, भारत के चार हजार सैनिक इस वक्त कांगो में तैनात हैं। 

क्या पहले भी शांति मिशन में शामिल भारतीय सैनिक शहीद हुए हैं?

संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में काम करते हुए अब तक भारत के 175 जवान शहीद हो चुके हैं। भारत संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सबसे ज्यादा जवान गंवाने वाला देश है। बीएसएफ के जो दो जवान मंगलवार को शहीद हुए हैं उनमें एक हेड कॉन्स्टेबल सांवल राम विश्नोई थे। दूसरे शहीद जवान का नाम कॉन्स्टेबल शिशुपाल सिंह था। 

संयुक्त राष्ट्र - फोटो : youtube

संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशन क्या है?

संयुक्त राष्ट्र 1948 से ही दुनिया के अलग-अलग देशों में शांति स्थापित करने के लिए काम कर रहा है। बीते 74 साल में संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक 71 फील्ड मिशन में शामिल रहे हैं। इस वक्त करीब 81 हजार 820 शांति सैनिक अलग-अलग देशों में 13 अलग-अलग शांति अभियानों के लिए काम कर रहे हैं। 1999 के बाद से इस तरह के अभियानों में करीब नौ गुना वृद्धि हुई है।

भारत समेत संयुक्त राष्ट्र संघ के 119 सदस्य देशों के सैन्य और पुलिसकर्मी इस शांति सेना का हिस्सा हैं। इस वक्त कार्यरत 81,820 शांति सैनिकों में से 72,930 सैनिक और सैन्य पर्यवेक्षक हैं, और लगभग 8,890 पुलिसकर्मी हैं। 

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संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भारत का कितना योगदान रहा है? 

1948 से अब तक संयुक्त राष्ट्र के कुल 71 शांति अभियान चले हैं। इनमें से 49 में भारत के 2.53 लाख से आधिक जवानों ने सेवा दी है। इस वक्त भारत से लगभग 5,500 सैनिक और पुलिसकर्मी संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में तैनात हैं। इनमें से करीब चार हजार अकेले कांगो में तैनात हैं। सैन्य योगदान देने वाले देशों में भारत पांचवां सबसे बड़ा देश है। इस वक्त चल रहे 13 शांति अभियानों में से आठ में भारतीय जवान तैनात हैं।  

 संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में भारत का योगदान 1950 के दशक में कोरिया में संयुक्त राष्ट्र के अभियान से शुरू हुआ। यहां कोरिया में युद्धबंदियों पर गतिरोध को हल करने के लिए भारत ने मध्यस्थ की सफल भूमिका निभाई। इन प्रयासों के चलते युद्धविराम पर हस्ताक्षर हुए और कोरियाई युद्ध समाप्त हुआ। भारतीय सशस्त्र बलों ने दक्षि, साइप्रस और कांगो जैसे देशों में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में हिस्सा लिया है। वियतनाम, कंबोडिया और लाओस के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के लिए तीन अंतरराष्ट्रीय आयोगों के अध्यक्ष के रूप में भी भारत ने काम किया।  

भारत ने सयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन पर पुरुषों के साथ ही महिलाओं को भी भेजा है। 2007 में भारत दुनिया का पहला देश बना, जिसने सिर्फ महिलाओं की टुकड़ी को संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन पर भेजा। इन महिलाकर्मियों ने न केवल पश्चिम अफ्रीकी राष्ट्र लाइबेरिया में सुरक्षा बहाल करने में भूमिका निभाई, बल्कि लाइबेरिया के सुरक्षा क्षेत्र में महिलाओं की संख्या में वृद्धि में भी योगदान दिया। 

इसी तरह दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में भारतीय पशु चिकित्सकों ने काम किया। इन लोगों ने इस युद्धग्रस्त देश के पशुपालकों की मदद की। उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण और जीवन रक्षक चिकित्सा सहायता प्रदान करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण सड़क मरम्मत कार्य भी किया है।

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