देश की ईंधन (पेट्रोल-डीजल) खपत अप्रैल में 66 फीसदी घट गई है, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले एक तिहाई कम है। इस दौरान विमान ईंधन (एटीएफ) की मांग में भी 90 फीसदी की गिरावट आई है। पेट्रोलियम उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि लॉकडाउन के कारण तमाम कारोबारी गतिविधियां बंद होने, वाहनों के आवागमन पर पाबंदी और उड़ानों पर रोक की वजह से ईंधन खपत में गिरावट आई है। हालांकि, इस दौरान मांग बढ़ने से घरेलू रसोई गैस सिलिंडर (एलपीजी) की बिक्री में 30 फीसदी की तेजी आई है।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के आंकड़ों (अनंतिम) आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में पेट्रोल की खपत घटकर 24 लाख टन और डीजल की 73 लाख टन रह गई। इसी तरह, एटीएफ की खपत भी कम होकर 6.45 लाख टन रह गई। अधिकारियों का कहना है कि मार्च, 2020 में देश में ईंधन बिक्री घटकर एक दशक से ज्यादा समय के निचले स्तर पर पहुंच गई। इसका असर अप्रैल में भी ईंधन खपत पर पड़ा है। मार्च में पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री 17.79 फीसदी घटकर 1.60 करोड़ टन रही थी। हालांकि, बुकिंग में तेजी के कारण पिछले महीने एलपीजी की बिक्री 1.9 फीसदी बढ़कर 23 लाख टन पर पहुंच गई।
लॉकडाउन के बाद बढ़ेगी खपत
अधिकारियों का कहना है कि लॉकडाउन खत्म होने के कारण कारोबारी गतिविधियों में तेजी आएगी। सार्वजनिक परिवहनों की आवागमन शुरू हो जाएगी। इससे ईंधन की खपत में तेजी आने की उम्मीद है। इससे पहले मार्च में पेट्रोल बिक्री में नकारात्मक वृद्धि देखने को मिली थी, जो पिछले 2.5 साल में पहली बार है। 2019-20 के शुरुआती 11 महीने में पेट्रोल बिक्री 8.2 फीसदी बढ़ी थी, जबकि डीजल खपत में जनवरी को छोड़कर अप्रैल, 2019 से फरवरी, 2020 के बीच 1.1 फीसदी की तेजी रही। अप्रैल-फरवरी के बीच एलपीजी खपत 6.2 फीसदी की बढ़ोतरी रही।