विदेश मंत्री एस जयशंकर यूरोपीय संघ (ईयू) के दूसरे हिंद-प्रशांत मंत्रिस्तरीय मंच (इंडो-पैसिफिक मिनिस्ट्रियल फोरम) में हिस्सा लेंगे। इसकी मेजबानी 13 मई को स्वीडन द्वारा की जानी है। इसकी सह-अध्यक्षता यूरोपीय संघ के विदेश मामलों और सुरक्षा नीति के उच्च प्रतिनिधि जोसेप बोरेल और स्वीडन के विदेश मामलों के मंत्री टोबियास बिलस्ट्रॉम द्वारा की जाएगी।
इस बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र और यूरोपीय संघ के करीब 60 विदेश मंत्रियों के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संगठनों और अन्य भागीदारों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाया जाएगा। चीन और ताइवान के फोरम का हिस्सा बनने की उम्मीद नहीं है।
ईयू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''हम करीब 60 प्रतिभागियों की उच्च स्तर की भागीदारी से खुश हैं और इस बात को जोर देकर बताना चाहते हैं कि जी-20 के अध्यक्ष जयशंकर भारत की ओर से मौजूद होंगे।" उन्होंने कहा, "जापान से विदेश मंत्री और जी-7 के अध्यक्ष हयाशी वहां होंगे।"
बैठक के दौरान दो को-मॉडरटर्स के साथ तीन राउंडटेबल सेशन आयोजित किए जाएंगे जिसमें प्रत्येक में बीस प्रतिभागी शामिल होंगे। मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में चीन के हिस्सा न लेने को लेकर ईयू के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अधिकारी ने कहा, चीन ने हिंद-प्रशांत अवधारणाओं के ढांचे में किसी भी भागीदार के साथ कभी भी काम नहीं किया है। वह इसकी आलोचना करता है।
उन्होंने कहा, हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि यूरोपीय संघ चीन के साथ इंगेज नहीं होगा। हमारे बीच वास्तव में कई प्रमुख मुद्दों पर खुले तौर पर बातचीत हुई है, जिनमें समुद्री शासन से लेकर हमारी हिंद-प्रशांत रणनीति में प्राथमिकता वाले कई मुद्दे शामिल हैं।
स्वीडिश विदेश मंत्री टोबियास बिलस्ट्रॉम और उच्च प्रतिनिधि/उपराष्ट्रपति जोसेफ बोरेल मुख्य दिन बैठक स्थल पर मंत्रियों का स्वागत करेंगे, जिसमें एचएम द किंग और एचआरएच स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस की उपस्थिति भी देखी जाएगी। यूरोपीय संघ के वरिष्ठ अधिकारी ने पिछले साल फरवरी में हुए पहले मंत्रिस्तरीय मंच पर भी यह कहते हुए प्रकाश डाला कि यह प्रतिभागियों के बीच स्पष्ट मुक्त-प्रवाह वाले आदान-प्रदान का एक अवसर है।