ये एक ऐसी पनडुब्बी है जिसे लंबी दूरी वाले मिशन में ऑक्सीजन लेने के लिए सतह पर आने की ज़रूरत नहीं है। इस तकनीक को डीआरडीओ के नेवल मैटेरियल्स रिसर्च लैब ने विकसित किया है। उदय भास्कर बताते हैं, "इस सबमरीन में एयर इंडिपेंडेंट प्रॉपल्शन तकनीक है जिसकी मदद से सबमरीन के अंदर ही ऑक्सीजन बनाई जा सकती है। ये हमारे डीआरडीओ ने विकसित की है।
पुरानी पनडुब्बी करंज के मुकाबले नई करंज में एआईपी को शामिल किया गया है। दरअसल, जब हम पनडुब्बी को बैटरी से चलाते हैं तो बैटरी को रिचार्ज करने के लिए पनडुब्बी को सतह पर आना पड़ता है। क्योंकि डीजल इंजन से हम बैटरी को चार्ज करते हैं और डीजल इंजन चलाने के लिए आपको ऑक्सीजन की जरूरत होती है। लेकिन एयर इंडिपेंडेंट प्रॉपल्शन एक ऐसी तकनीक है जिसकी मदद से पनडुब्बी को बैटरी चार्ज करने के लिए सतह पर आने की ज़रूरत नहीं पड़ती है।"
क्या दोहरे मोर्चे पर युद्ध में होगी मददगार?
उदय भास्कर बताते हैं, "ये अजीब बात की जा रही है कि इससे चीन और पाकिस्तान परेशान हो जाएंगे. भारत की पनडुब्बी शक्ति काफी कम हो गई थी। पिछले साल दो एक्सीडेंट हो गए थे। 15 साल तक हमने नई पनडुब्बी शामिल नहीं की थी। ऐसे में हम इस समय बेहद नाज़ुक स्थिति में पहुंच गए थे। इसलिए पाकिस्तान और चीन इस पनडुब्बी से डरने वाले नहीं हैं। वे इसकी निगरानी जरूर रखेंगे।"