विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को पनामा के अपने समकक्ष जेवियर मार्टिनेज आचा वास्केज का स्वागत किया। इस दौरान जयशंकर ने बदलते वैश्विक व्यापारिक माहौल के बीच दोनों देशों के बीच हर क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जताई। प्रतिनिधिमंडल स्तर की इस वार्ता में दोनों देशों के बढ़ते सहयोग पर खास जोर दिया गया।
इस दौरान जयशंकर ने पनामा के विदेश मंत्री को बीते साल संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान आयोजित 5वीं भारत–एसआईसीए विदेश मंत्रियों की बैठक की संयुक्त रूप से अध्यक्षता करने की याद दिलाते हुए कहा कि वास्केज की यह यात्रा भारत और पनामा के बीच लगातार बढ़ रहे उच्च-स्तरीय संपर्कों को आगे बढ़ाने वाला अहम कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा दोनों देशों की मित्रता और सहयोग को नई मजबूती देगी।
भारत की स्थायी यूएनएससी सदस्यता के समर्थन में उतरा पनामा
वास्केज ने वैश्विक शासन व्यवस्था में व्यापक सुधारों की जोरदार वकालत करते हुए कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था आज की दुनिया की वास्तविकताओं को नहीं दर्शाती। भारत, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और एक उभरती महाशक्ति होने के कारण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की स्थायी सदस्यता का हकदार है। उन्होंने कहा कि लगभग 80 वर्ष पहले बनी वैश्विक व्यवस्था को बदलकर वर्तमान समय के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पनामा भारत को यूएनएससी का स्थायी सदस्य बनाए जाने का पूरी मजबूती से समर्थन करता है। साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधारों की मांग करते हुए कहा कि लैटिन अमेरिका और कैरेबियन को भी सुरक्षा परिषद में स्थायी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, जिससे परिषद अधिक संतुलित और प्रतिनिधिक बन सके। इसके साथ ही उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की जीरो टॉलरेंस नीति का समर्थन की सराहना की।
मुलाकात में क्या बोले एस जयशंकर?
इस दौरान जयशंकर ने कहा कि तीन वर्ष पहले उनकी पनामा यात्रा के बाद से दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं और यह यात्रा उसी सकारात्मक रफ्तार को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सरकारें और नेतृत्व साझेदारी को हर क्षेत्र में व्यापक और गहरा बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि भारत पनामा के साथ और घनिष्ठ संबंध चाहता है क्योंकि पनामा की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, आर्थिक स्थिरता और विकास की अपार संभावनाएं उसे भारत का अहम साझेदार बनाती हैं।
दोनों देशों के बीच यह द्विपक्षीय बातचीत ऐसे वक्त में हो रही है जब पनामा नहर की अंतरराष्ट्रीय तटस्थ स्थिति और मजबूत करने के लिए भारत को पनामा नहर तटस्थता संधि से जोड़ने के लिए सक्रिय कूटनीतिक कोशिश कर रहा है।
भारत बने पनामा नहर तटस्थता संधि का सदस्य
वहीं, भारत के साथ संबंध मजबूत करने की यह पहल पनामा की संप्रभुता, स्वतंत्र विदेश नीति और पनामा नहर की सुरक्षा को और मजबूत करने की व्यापक रणनीति है। इस दौरान पनामा के विदेश मंत्री वास्केज ने कहा कि पनामा भारत को रणनीतिक साझेदार बनाकर पनामा नहर की पूर्ण तटस्थता सुनिश्चित करना चाहता है। उन्होंने कहा कि उनका देश बाहरी दबाव या बयानबाजी को खारिज करते हुए अपनी संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
वास्केज ने कहा कि पनामा नहर स्वयं देश की संप्रभुता का सबसे बड़ा प्रतीक है, क्योंकि बीते 25 साल से इसका संचालन पनामा के लोगों ने दक्षता, जिम्मेदारी और सुरक्षा के साथ किया है। उन्होंने बताया कि नहर का विस्तार भी पनामा ने अपने संसाधनों से किया और इस उपलब्धि पर देश को गर्व है।
उन्होंने यह भी बताया कि उनकी भारत यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य विदेश मंत्री जयशंकर के साथ इस विषय पर चर्चा करना है कि भारत पनामा नहर तटस्थता संधि का सदस्य बने। उनके अनुसार, पनामा चाहता है कि पूरी दुनिया इस नहर को पनामा की संप्रभु संपत्ति और एक सम्मानित अंतरराष्ट्रीय धरोहर के रूप में स्वीकार करती रहे।