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HDI 2025: मानव विकास सूचकांक में भारत की छलांग, 193 देशों में 130वां स्थान; शिक्षा व आर्थिक मोर्चो पर सुधार

Tue, 06 May 2025 04:46 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत ने 2025 मानव विकास सूचकांक में 193 देशों की सूची में 130वां स्थान हासिल किया। यह रैंकिंग 2022 में 133 थी जो अब तीन स्थान ऊपर चढ़ गई है। एचडीआई के अनुसार भारत में शिक्षा और आर्थिक मौर्चो में जबरदस्त सुधार देखा गया है।

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भारत की प्रगति - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत ने संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा जारी 2025 मानव विकास रिपोर्ट (एचडीआर) में मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) में सुधार करते हुए 193 देशों में से 130वां स्थान हासिल किया है। यह रैंकिंग 2022 में 133 थी, जो अब तीन स्थान ऊपर चढ़ गई है। बता दें कि भारत का एचडीआई स्कोर 0.676 से बढ़कर 0.685 हो गया है, जो मध्यम मानव विकास श्रेणी में आता है। वहीं उच्च मानव विकास (HDI ≥ 0.700) के करीब है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया कि असमानता के कारण भारत की एचडीआई में 30.7% की कमी आती है, जो क्षेत्र में सबसे अधिक है।

शिक्षा और जीवन प्रत्याशा में सुधार

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जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जीवन प्रत्याशा 71.7 साल से बढ़कर 72 साल हो गई है, जो अब तक की सबसे अधिक है। वहीं औसत पढ़ाई के साल 6.57 से बढ़कर 6.88 हो गए हैं। हालांकि, स्कूलिंग के अनुमानित वर्षों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। शिक्षा में सुधार के लिए रिपोर्ट ने 1990 के बाद की नीतियों जैसे शिक्षा का अधिकार, ‘समग्र शिक्षा अभियान और नई शिक्षा नीति 2020 की सराहना की, लेकिन यह भी कहा कि पढ़ाई की गुणवत्ता और सीखने के परिणामों पर अभी और काम करने की जरूरत है।

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आर्थिक मंचो पर भी उन्नति

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भारत की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) 2021 की क्रय शक्ति समता (पीपीपी) के अनुसार यूएसडी 8,475.68 से बढ़कर यूएसडी 9,046.76 हो गई है। 1990 से अब तक भारत की एचडीआई में 53% से अधिक की वृद्धि हुई है, जो वैश्विक और दक्षिण एशियाई औसत से तेज है। इसका श्रेय आर्थिक विकास, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, जैसे आयुष्मान भारत, जननी सुरक्षा योजना, पोषण अभियान और मनरेगा, जनधन योजना और डिजिटल समावेशन को दिया गया है। वहीं अबतक 2015-16 से 2019-21 के बीच 13.5 करोड़ भारतीय बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं।

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एआई के क्षेत्र में भी भारत का बोलबाला
इसके साथ ही रिपोर्ट में कहा गया कि भारत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में भी अग्रणी बन रहा है। देश में एआई कौशल सबसे अधिक दिखाया गया है और 20% भारतीय एआई शोधकर्ता अब देश में ही बने रह रहे हैं, जो 2019 में लगभग शून्य था। भारत में एआई का उपयोग अब कृषि, स्वास्थ्य सहित कई क्षेत्रों में हो रहा है और इसे सभी तक पहुंचाने के लिए नए प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि यूएनडीपी ने इस बात पर चेतावनी भी दी है कि वैश्विक स्तर पर मानव विकास की प्रगति अब तक की सबसे धीमी हो गई है, जो चिंताजनक है।

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