अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने मंगलवार को कहा कि नोटबंदी और जीएसटी के कारण भारत की विकास दर में गिरावट आएगी और वह चीन से इस मामले में पिछड़ जाएगा।
2017 में उसकी विकास दर 6.7 फीसदी रहेगी, जबकि अप्रैल और जुलाई में जारी किए गए अनुमानों में देश की विकास दर 7.2 फीसदी रहने की बात कही गई थी। इस तरह ताजा अनुमान में आईएमएफ ने विकास दर में आधा फीसदी की कमी की है।
भारत की विकास दर के अनुमान को घटाने के साथ आईएमएफ ने चीन की विकास दर में 0.1 फीसदी की बढ़ोतरी की है। इसके अनुसार 2017 में चीन की विकास दर 6.7 के बजाय 6.8 फीसदी रहेगी।
ये भी पढ़ेंः 2014 में भारत से 21 अरब डॉलर काला धन भेजा गया बाहर: जीएफआई
आईएमएफ ने भारत के इस साल के अलावा वर्ष 2018 के विकास अनुमान में भी कमी की है। पहले के अनुमानों में इसके 7.7 फीसदी रहने की बात कही गई थी, जबकि ताजा अनुमान में इसके 7.4 फीसदी रहने की संभावना जताई गई है। आईएमएफ के अनुसार 2016 में भारत की विकास दर 7.1 फीसदी रही थी, जो अप्रैल में जारी अनुमान से 0.3 फीसदी ज्यादा रही थी।
आईएमएफ ने अपनी ताजा वैश्विक आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में कहा है कि भारत में नोटबंदी के कारण आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती आई, जबकि जुलाई में देश भर में लागू किए गए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के कारण अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का माहौल पैदा हुआ।
सरकारी खर्च में बढ़ोतरी और आर्थिक विकास दर की गणना के लिए आधार वर्ष में तब्दीली के कारण 2016 में उसकी विकास दर बढ़कर 7.1 फीसदी पर पहुंच गई, जो आईएमएफ के अप्रैल के अनुमान से 0.3 फीसदी ज्यादा था। इसी तरह, आधार वर्ष बदले जाने के कारण 2014 और 2015 की विकास दर में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की वार्षिक बैठक से पहले जारी इस रिपोर्ट में भले ही 2017 में विकास दर के मामले में चीन हमसे आगे निकलता दिख रहा है लेकिन 2018 में भारत फिर से दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर लेगा।
2018 में चीन की विकास दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान है जबकि भारत की विकास दर इस अवधि में 7.4 फीसदी रहने की संभावना है। इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में भारत की विकास दर 8.2 फीसदी हो जाएगी।