भारत की आर्थिक विकास दर सात फीसदी नहीं है। सरकार का दावा गलत है। भारतीय मूल के जाने-माने अर्थशास्त्री विजय आर. जोशी ने भारत के आर्थिक विकास से संबंधित आंकड़ों को खारिज करते हुए कहा कि सात फीसदी ग्रोथ के दावे में दम नहीं है। क्योंकि अर्थव्यवस्था के कई सेक्टरों में ग्रोथ रेट सपाट है।
ऑक्सफोर्ड में इकोनॉमिक्स के मानद रीडर विजय आर जोशी ने वाशिंगटन में कहा कि भारत का नेशनल अकाउंट्स यह दिखा रहा है कि इसकी आर्थिक विकास दर सात फीसदी है। लेकिन हमारा और कई अय अर्थशास्त्रियों को भारत के नेशनल अकाउंट्स पर भरोसा नहीं है। जोशी ने कहा है कि भारत की विकास दर 5.5 फीसदी पर पहुंच चुकी है। लेकिन नेशनल अकाउंट्स बेहतर तस्वीर पेश कर रहा है।
अमेरिकी थिंक टैंक कार्नेगी इंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस की से आयोजित एक चर्चा में लंदन में रहने वाले अर्थशास्त्री जोशी ने अपनी बात साबित करने के लिए कई तर्क दिए।
उन्होंने कहा कि भारत में ही सात फीसदी की ग्रोथ दिख रही है कहीं और नहीं। लेकिन अगर आप भारत के आयात-निर्यात की ग्रोथ देखें तो यह सपाट है। या तो यह घट रही है या फिर भी बहुत धीमी बढ़ रही या फिर सपाट है। संगठित उद्योगों में रोजगार की दर ठहरी हुई है। औद्योगिक उत्पादन में भी ग्रोथ बेहद धीमी है।