रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दावा किया कि भारत का रक्षा निर्यात 1,000 करोड़ से बढ़कर 39,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जबकि घरेलू उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि स्वदेशीकरण, निजी क्षेत्र की भागीदारी और स्टार्टअप्स की वजह से संभव हुई है। पढ़िए रिपोर्ट-
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 39 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो 2014 में करीब 1,000 करोड़ रुपये था। उन्होंने कहा कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने वाले सुधारों की वजह से यह बढ़ोतरी हुई हुई है। राजनाथ सिंह वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
विज्ञापन
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने क्या कहा?
राजनाथ सिंह ने दावा किया कि पिछले एक दशक में देश के रक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव आए हैं।
उन्होंने कहा कि पहले भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए काफी हद तक दूसरे देशों पर निर्भर था। लेकिन अब देश तेजी से रक्षा निर्माण और निर्यात के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि 2014 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 46 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि इस बढ़ोतरी में स्वदेशी प्लेटफॉर्म, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और स्टार्टअप्स की अहम भूमिका रही है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया और तकनीक विकास कोष जैसी योजनाओं ने देश की रक्षा क्षमता को मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देना और उन्हें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ना है।
'मौजूदा उपलब्धियां केवल शुरुआत है'
उन्होंने कहा कि मौजूदा उपलब्धियां सिर्फ शुरुआत है और देश को अभी और आगे जाना है। गुजरात की भूमिका को अहम बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां का औद्योगिक ढांचा, कुशल कार्यबल और उद्यमिता भविष्य की प्रगति में अहम योगदान देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाला समय चिप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष तकनीक पर आधारित होगा, जो रक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा।
'आत्मनिर्भरता की दिशा में योगदान दें उद्योग'
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत आत्मनिर्भरता के साथ-साथ विदेशी कंपनियों के साथ सहयोग, तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त उद्यमों का भी स्वागत करता है। लेकिन इसका लाभ भारत में ही होना चाहिए। उन्होंने उद्योगों से अपील की कि वे देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में योगदान दें। ऐसे उत्पाद तैयार करें, जो देश की जरूरतों के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी उपयोगी हों।