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ब्रम्होस पर भड़कने वाले चीन को भारतीय ने दिया मुंहतोड़ जवाब

Wed, 24 Aug 2016 12:26 AM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
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brahmos missile
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अरुणाचल प्रदेश में ब्रम्होस मिसाइल तैनात करने के भारत के निर्णय पर चीनी सेना ने भारत को चेतावनी दी थी। चीन की इस चेतावनी का भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए कहा है कि सीमा की सुरक्षा के लिए हमारी अपनी प्राथमिकताएं हैं, चीन इसमें किसी तरह का दखल न दे। हम अपनी सीमा के अंदर किसी भी तरह के हथियार की तैनाती करें यह दूसरे देश का मसला नहीं है। यह हमारा अपना मामला है और हम इस पर अपने तरीके से काम करेंगे। 
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ब्रम्होस - फोटो : ..
सोमवार को चीनी सेना ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए द पीएलए डेली में भारत को चेतावनी दी थी और कहा था कि चीन भी इस तरह के कदम उठा सकता है, जिससे रिश्‍तों पर न केवल नकारात्‍मक प्रभाव पड़ेगा, बल्‍क‍ि क्षेत्रीय संतुलन पर भी असर पड़ेगा। पीएलए डेली में लिखा गया कि ''भारत बॉर्डर पर सुपरसोनिक मिसाइलें तैनात करके आत्‍मरक्षा की जरूरत की सीमा को पार कर गया है। 

भारत के इस कदम से चीन के तिब्‍बत के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। पीएलए डेली का दावा किया था कि भारत ने ‘जवाबी संतुलन कायम करने और टकराव पैदा करने’ के नजरिए की वजह से यह कदम उठाया है। 

भारतीय मिसाइल प्रणाली - फोटो : Getty
जानकारों का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश में ब्रम्होस मिसाइल की तैनाती से चीन को अचरज नहीं होना चाहिए क्योंकि पहले से ही भारतीय सेना ने सीमा की सुरक्षा के लिए अरुणाचल प्रदेश में कई अन्य मिसाइल प्रणाली तैनात कर रखी हैं। चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना हक जताता रहा है जबकि भारत इसे अपना भू-भाग बताता है। दोनों देशों के बीच नियंत्रण रेखा का निर्धारण नहीं हुआ है।

ऐसे में चीनी सैनिकों द्वारा सीमा पार करने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। ऐसे में भारत ने हाल ही में अरुणाचल में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं जिनमें सड़कों का नेटवर्क बेहतर करने के साथ-साथ लड़ाकू विमानों की तैनाती जैसे कई मसले हैं। ऐसे में सुपरसोनिक ब्रम्होस मिसाइल की तैनाती की खबर से चीन भड़क गया है। 
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ब्रम्होस - फोटो : ..
ब्रह्मोस मिसाइलों की रेंज 290 किमी है। इसे भारत-रूस के साझा सहयोग से तैयार किया गया है। सेना ने इसके कई टेस्‍ट किए हैं। आखिरी टेस्‍ट मई 2015 में पूर्वी सीमा में तैनात किए गए थे। इन मिसाइलों की एक खासियत यह भी है कि ये पहाड़ों के संकरे इलाकों में छिपे लक्ष्‍यों को निशाना बना सकती है।

 इसे किसी भी प्‍लेटफॉर्म, मसलन-सबमरीन, शिप, एयरक्राफ्ट और जमीन पर लगे मोबाइल लॉन्‍चर्स के जरिए दागा जा सकता है। 

यह मिसाइल ध्‍वनि की रफ्तार के मुकाबले 2.8 गुना रफ्तार से चलती है। यह 300 किलो वजन तक के पारंपिक आयुध ढोने में सक्षम है। चीन मानता है कि इन मिसाइलों की जद में आने वाले उसके सीमा से सटे इलाकों पर तेज और सटीक हमला किया जा सकता है।
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