भारत और रूस अब साथ मिलकर के 5वीं पीढ़ी का फाइटर जेट प्लेन का डिजाइन तैयार करेंगे। इसके लिए जल्द ही डील पर अंतिम मुहर लगेगी। दोनों देश इस मल्टी बिलियन डॉलर प्रोजेक्ट का साथ में मिलकर बनाएंगे।
सरकार ने पूरा किया डील के लिए ग्राउंड वर्क
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने इस डील के लिए अपना ग्राउंड वर्क पूरा कर लिया है। इसके लिए सरकार ने कांटैक्ट को तैयार कर लिया है और अगले 6 महीनों में इस पर हस्ताक्षर हो जाएंगे, जब मोदी और पुतिन एक साथ मिलेंगे।
भारत को इस टेक्नोलॉजी को बराबर के अधिकार होंगे और दोनों देश इसको को-डेवलप भी करेंगे। भारत की तरफ से पहल कर रहे अधिकारियों ने रूस से कहा कि उसको सारे कोड और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी का एक्सेस मिलें, जिससे वो एयरक्रॉफ्ट को अपने हिसाब से अपग्रेड कर सके।
फरवरी 2016 में शुरू हुई थी बातचीत
पिछले साल फरवरी में दोनों देशों के बीच इस प्रोजेक्ट को लेकर के बातचीत शुरू हुई थी, जब पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने अपनी सहमति दे दी थी। 2007 में भारत और रूस ने इस प्रोजेक्ट पर अपनी सहमति दी थी, लेकिन इस पर किसी तरह का कोई डेवलपमेंट 10 सालों में नहीं हुआ था। हालांकि दिसंबर 2010 में भारत फाइटर प्लेन के डिजाइन के लिए रूस को 295 मिलियन डॉलर देने को राजी हुआ था।