भारत और रूस जल्द ही कामोव-226 हेलीकॉप्टर, लड़ाकू नौसेना पोत समेत कई तरह की अन्य रक्षा निर्माण परियोजनाओं में साझेदार बन सकते हैं। इसके लिए गुरुवार को भारत और रूस के रक्षा मंत्रियों के बीच विस्तार से चर्चा हुई है और दोनों देशों का मानना है कि इस साझेदारी से आपसी संबंध और ज्यादा मजबूत होंगे।
रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और उनके रूसी समकक्ष जनरल सर्गेई शोइगू ने यहां भारत-रूस अंतर-सरकार आयोग - सैन्य तकनीकी सहयोग (आईआरआईजीसी-एमटीसी) की 18वीं बैठक में शिरकत की। बैठक में दोनों पक्षों ने ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रूस में निर्मित सैन्य उपकरणों के स्पेयर-पार्ट्स को भी भारत में संयुक्त साझेदारी में बनाए जाने पर आगे बढ़ने के लिए सहमति जताई।
शोइगू की भारत यात्रा इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि दोनों देशों के बीच रूसी एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम खरीदने के सौदे पर हस्ताक्षर हो चुके हैं और साथ ही भारतीय नेवी के लिए गोवा में मिलकर दो लड़ाकू पोत बनाने का सौदा भी तय हो चुका है। रूसी सरकार के स्वामित्व वाली हथियार निर्यातक कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने भारत के लिए कम दूरी का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम बनाने के टेंडर में 3 अरब डॉलर की सबसे कम दाम वाली बोली लगाई है।
नए सिरे से किया गया आयोग का समझौता
दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने आईआरआईजीसी-एमटीसी में फेरबदल के बाद बनाए गए आयोग के नए समझौता पत्र पर भी हस्ताक्षर किए, जिसके बाद अब इस आयोग का नाम आईआरआईजीसी-सैन्य व सैन्य तकनीकी सहयोग हो जाएगा यानी इसमें महज सैन्य उपकरणों की खरीद पर ही चर्चा नहीं होगी, बल्कि सैन्य तकनीकी के आदान-प्रदान की भी राह खुलेगी।