नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया।
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नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि भारत संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के लिए हवाई यातायात अधिकार बढ़ाने पर विचार नहीं कर रहा है। यूएई ने भारत से आग्रह किया है कि वह दोनों देशों के बीच अधिकतम सीटों की संख्या प्रति सप्ताह 50,000 तक बढ़ाए, लेकिन सिंधिया ने कहा कि इस समय हम इसे बढ़ाने के बारे में नहीं सोच रहे हैं।
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में से एक है। हालात यह है कि यात्रियों की संख्या के मुकाबले एयरलाइंस के पास विमानों की कमी पड़ रही है। इसे दूर करने के लिए पिछले महीने ही एयर इंडिया ने 470 जेट विमानों की खरीद के लिए ऑर्डर दिया है। भारत के अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात का बड़ा हिस्सा खाड़ी के एयरलाइंस की ओर से संचालित किया जाता है जो सैलानियों के लिए बड़े केंद्र हैं।
सिंधिया ने कहा कि वह चाहते हैं भारतीय एयरलाइंस और अधिक बड़े आकार वाले विमान खरीदें और अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए बिना रुके लंबी दूरी की विमान सेवा प्रदान करें। उन्होंने कहा कि भारत अपनी 1.3 अरब की आबादी की हवाई परिवहन की जरूरतों को पूरा करने में जुटा है।
2024 तक देश में होंगे 100 एयरपोर्ट
कम दूरी वाले हवाई अड्डे की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी की जाएगी। नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि 2024 तक देश में ऐसे हवाई अड्डों की संख्या बढ़ाकर 100 तक करने का लक्ष्य है, जो अभी 74 हैं। उड़ान योजना को 2016 में शुरू किया गया था। सिंधिया ने कहा, उड़े देश का आम नागरिक (उड़ान) के तहत आम यात्रियों को भी विमान में यात्रा करने का अवसर देने का लक्ष्य है। पिछले छह साल में यात्रियों की संख्या दोगुनी हो गई है। भारत दुनिया के विमानन क्षेत्र में तीसरा सबसे बड़ा बाजार है।
उन्होंने कहा, हमने देश के अंतिम छोर तक विमानन सेवाओं को पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। उड़ान के तहत छोटे एयरक्राफ्ट को लाया जा रहा है। हमारा विश्वास है कि 2030 तक हमारा विमानन उद्योग तीन लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा। भारत ने हवाई यात्रा की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में हवाई अड्डों, विमानों और भर्ती में अरबों डॉलर का निवेश करने की योजना की रूपरेखा तैयार की। उन्होंने दावा किया कि आने वाले पांच से सात सालों में ही घरेलू एयरलाइंस के पास करीब दो हजार विमानों का बेड़ा होगा। ऐसे में अब देश को एयरोस्पेस उत्पादों के निर्माण के बारे में भी सोचना चाहिए।