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वायु सेना होगी और मजबूत: भारत को मिली खतरनाक इस्राइली स्पाइक NLOS मिसाइल; जल्द होगा परीक्षण

Thu, 03 Aug 2023 07:38 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में जिस पैमाने पर टैंक रोधी मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ है, उसे देखते हुए भारतीय वायु सेना अपने रूसी हेलिकॉप्टर बेड़े को इस्राइली एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (एनएलओसएस) से लैस कर रहा है।
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NLOS missiles - फोटो : ANI
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विस्तार
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पहाड़ों के पीछे छिपे दुश्मन के ठिकानों को नष्ट करने के लिए भारतीय वायुसेना खुद को मजबूत कर रही है। इसी क्रम में अपनी क्षमता तो बढ़ावा देने के लिए भारतीय वायु सेना (आईएएफ) को इस्राइली स्पाइक नॉन लाइन ऑफ साइट (एनएलओएस) एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें मिली हैं। ये 30 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य पर हमला कर सकती है। इसके जरिए जरूरत पड़ने पर ऊंचाई वाले इलाकों में दुश्मन के टैंकों को ध्वस्त किया जा सकेगा।  

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रक्षा सूत्रों ने इस बारे में जानकारी है। उन्होंने बताया है कि इस्राइल की खतरनाक स्पाइक एनएलओएस एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें भारत को दी जा चुकी हैं। वायुसेना जल्दी ही इसका परीक्षण भी करेगी। 

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में जिस पैमाने पर टैंक रोधी मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ है, उसे देखते हुए भारतीय वायु सेना अपने रूसी हेलिकॉप्टर बेड़े को इस्राइली एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (एनएलओसएस) से लैस कर रहा है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक रूसी हेलिकॉप्टर बेड़े एमआई-17वी5 में इस्राइली एनएलओएस लगाने से यह संघर्ष की स्थिति में काफी दूर से अपने लक्ष्य को निशाना बना पाएगी और आपात स्थिति में यह काफी असरदार साबित होगी। रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी रिपोर्ट में यह बताया गया है कि रूसी सेना के खिलाफ यूक्रेन के सैनिकों ने पश्चिमी यूरोपीय राष्ट्रों और अमेरिका द्वारा मुहैया कराई गई टैंक रोधी मिसाइलों का बड़े प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया है। 
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 दरअसल, भारतीय वायु सेना ने इन मिसाइलों में दिलचस्पी लेना दो साल पहले शुरू किया, जब पूर्वी लद्दाख में नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास चीन ने भारी संख्या में सैनिकों और टैंकों की तैनाती की थी। पहले टैंकों से युद्ध के लिए पश्चिमी सीमा अनुकूल मानी जाती थी, लेकिन अब यह पश्चिमी और पूर्वी सीमा दोनों में अहम भूमिका निभा सकती है। सूत्रों के मुताबिक सेना ने एनएलओएस टैंक रोधी मिसाइलों की सीमित संख्या के लिए ही ऑर्डर दिया है। बड़ी संख्या में इसकी कमी को ‘मेक इन इंडिया’ अभियान से पूरी करने की तैयारी है। 

दो साल पहले चीन द्वारा दिखाई गई आक्रामकता के कारण देश के सामने पैदा हुए खतरे को देखते हुए भारतीय सेना और वायु सेना दोनों ने भारतीय और विदेशी दोनों हथियारों के माध्यम से अपने शस्त्रागार को काफी मजबूत किया है। भारतीय वायु सेना के शीर्ष अधिकारी स्वदेशीकरण पर बहुत जोर दे रहे हैं।  

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