'इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक' विश्व युद्ध के वक्त की फोन बेस्ड टेक्नोलॉजी के आधार पर अपने बड़े नेटवर्क की मदद से 850 मिलियन यूजर के जरिए अपना व्यवसाय बढ़ा रहा है। इन ग्राहकों के पास टेलीफोन बैंकिंग जैसी सुविधा मुहैया नहीं है, और ये लोग अभी भी पुरानी व्यवस्थाओं के जरिए बैंकिंग सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक एक अधिकारी बताते हैं कि बैंक और पेमेंट बैंक दोनों ही चीजें अलग-अलग हैं। 90 फीसद से ज्यादा घर बैंक अकांउट्स के जरिए लेनेदेन कर रहे हैं। वहीं हमारा लक्ष्य बिल पेमेंट्स को लेकर है।
बैंक ने पिछले महीने ही 5.5 प्रतिशत ब्याज की स्कीम लांच की है। पूरी तरह से बैंकों से अलग, पेमेंट बैकों में 1 लाख रुपये तक डिपोजिट की सुविधा है, लेकिन इसका 75 फीसदी फंड सरकारी बॉंड पर खर्च करना होगा। 1.5 लाख पोस्ट ऑफिस के नेटवर्क साथ आईपीपीबी बैंकों के लिए बड़ा प्रतियोगी साबित हो सकता है, खासकर गांवों और छोटे कस्बों में।