प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने भारत को जनसंख्या विस्फोट के पुराने डर से बाहर निकलने और आबादी पर लगाम लगाने वाली योजनाओं को बंद करने की सिफारिश की है। साथ ही चीन की गलती से सबक लेने को भी कहा है।
‘द घोस्ट ऑफ पॉपुलेशन पास्ट'
हाउ पॉपुलेशन कंट्रोल परसिस्ट्स इन इंडिया’ नामक रिपोर्ट में परिषद ने कहा, देश की जनसांख्यिकीय स्थिति अब पुरानी सोच से काफी अलग है। पीएम के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल की टीम ने यह रिपोर्ट तैयार की है। इसके मुताबिक, भारत की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) घटकर 1.9 रह गई है, जबकि आबादी को स्थिर रखने के लिए 2.1 की दर जरूरी मानी जाती है। यूपी (2.6) व बिहार (2.9) को छोड़ दें तो राष्ट्रीय प्रजनन दर 1.6 रह जाती है।
निजी पसंद पर परिवार नियोजन के खिलाफ नहीं
संजीव सान्याल, सदस्य, पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद का कहना है कि भविष्य की आबादी का आधार सिकुड़ रहा है। हम स्वास्थ्य, बच्चों के बीच अंतर रखने या निजी पसंद के आधार पर परिवार नियोजन के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन सरकारी नीति के मकसद के तौर पर जनसंख्या नियंत्रण अब प्रासंगिक नहीं है।
50 साल पुराने स्तर पर पहुंचे जन्म के आंकड़े
रिपोर्ट के अनुसार भारत में सालाना जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या 2001 में 2.93 करोड़ पर पहुंच गई थी। 2023 तक यह घटकर 2.32 करोड़ रह गई, जो लगभग 20 फीसदी की गिरावट है। देश में आज सालाना पैदा होने वाले बच्चों की तादाद 1974 यानी करीब 50 साल पहले के स्तर पर आ चुकी है।
नसबंदी योजनाओं को बंद करें...
ईएसी ने भारत को जनसंख्या नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की भी सिफारिश की है। इसमें कम प्रजनन दर वाले राज्यों में नसबंदी के लिए लाभार्थियों और प्रेरकों को दी जाने वाली सभी नकद प्रोत्साहन योजनाओं को बंद करने को कहा है।
चीन की कुल प्रजनन दर एक से भी नीचे
रिपोर्ट में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर चीन की गलतियों से सबक लेने की जरूरत पर बल दिया गया है। चीन ने 1991 में प्रजनन दर प्रतिस्थापन स्तर से नीचे आने के बाद भी अपनी वन चाइल्ड पॉलिसी और प्रशासनिक मशीनरी को दो दशकों से अधिक समय तक बनाए रखा। आज चीन की टीएफआर एक से भी नीचे गिर गई है।