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आकाशतीर: चीन और तुर्किये की तकनीक पर भारी पड़ी स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली; दुश्मन को संभलने का नहीं मिला मौका

Fri, 16 May 2025 08:07 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाने के बाद बौखलाए पाकिस्तान ने 9-10 मई की रात भारत पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। लेकिन भारत की स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली 'आकाशतीर' ने दुश्मन के हर हमले को हवा में ही नाकाम कर दिया। रक्षा मंत्रालय ने इसे आधुनिक युद्ध का ऐतिहासिक क्षण बताते हुए आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि कहा है।
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आकाशतीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंकवादियों के अड्डों को ध्वस्त करने से तिलमिलाए पाकिस्तान ने 9 और 10 मई की रात को भारत के नागरिक और सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन से घातक हमले किए थे। भारत के स्वदेशी 'आयरन डोम' आकाशतीर ने दुश्मन देश की हर मिसाइल और ड्रोन का अपने नाम के मुताबिक आकाश में ही काम तमाम कर दिया। पाकिस्तान से छोड़े गए हथियार भारत की जमीन पर गिरे जरूर, लेकिन तिनके-तिनके में।
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भारत ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में 26 निर्दोष और निहत्थे पर्यटकों की निर्मम तरीके से की गई हत्या के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और 6 व 7 मई की दरम्यानी रात पाकिस्तान के पंजाब और उसके कब्जे वाले कश्मीर में आतंकियों के नौ ठिकानों को मिट्टी में मिला दिया। इससे नाराज आंतंकियों के आका पाकिस्तान ने चीन और तुर्किये से अनुदान में मिले ड्रोन और मिसाइलों से भारत पर हमला किया, तो उन्हें भारत के स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली आकाशतीर से चुनौती मिली। आकाशतीर की रियल-टाइम क्षमता ने पाकिस्तान की मिसाइलों और ड्रोन को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। इसके बाद तो भारत ने पाकिस्तान को उसके दुस्साहस का जवाब देते हुए उसके 13 सैन्य ठिकानों को सटीकता से भेदा और उन्हें बहुत नुकसान पहुंचाया।

तेजी से टोह लेने के साथ करता है हमला
आकाशतीर न सिर्फ दुश्मन की तरफ से आने वाले खतरों का तेजी से टोह लेता है, बल्कि त्वरित निर्णय लेते हुए उन पर हमला भी करता है। 9 और 10 मई की रात को आकाशतीर ने पाकिस्तान के सभी आने वाले हवाई ड्रोन, मिसाइलों, अन्य माइक्रो यूएवी और अन्य हथियारों को रोक दिया और उन्हें भारतीय हवाई क्षेत्र में घुसने नहीं दिया। पूरी तरह से स्वदेशी आकाशतीर आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है और उसकी क्षमता को दर्शाता है। आकाशतीर की तुलना में पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली, जिसमें एचक्यू-9 और एचक्यू-16 शामिल थे, भारतीय हथियारों का पता लगाने और उन्हें समय पर रोकने में विफल साबित हुए, जिससे उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा।
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रात के अंधेरे का योद्धा
कई उच्च तकनीक के एकीकरण से तैयार आकाशतीर रात के अंधेरे का योद्धा है। इसके एकीकृत सेंसर में टैक्टिकल कंट्रोल रडार रिपोर्टर, 3डी टैक्टिकल कंट्रोल रडार, लो-लेवल लाइटवेट रडार और आकाश हथियार प्रणाली का रडार शामिल हैं। न यह लड़ाकू विमान की तरह दहाड़ता है और न ही यह मिसाइल की तरह चमकता ही है। यह अदृश्य रक्षा कवच सुनता है। गणना करता है और हमला करता है। यह भारत की वायु रक्षा की तीखी धार है। आकाशतीर व्यापक सी4आईएसआर (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशंस, कंप्यूटर, इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही) ढांचे का हिस्सा है, जो अन्य प्रणालियों के साथ समन्वय में काम करता है। वाहन आधारित इस प्रणाली को कहीं भी ले जाया जा सकता है।

आकाशतीर: निष्क्रिय रडार से चतुराई से युद्ध तक
आकाशतीर क्रूर बल के बारे में नहीं है, यह बुद्धिमान युद्ध के बारे में है। यह सिस्टम सभी शामिल पक्षों (नियंत्रण कक्ष, रडार और डिफेंस गन) को एक सामान्य, वास्तविक समय की हवाई तस्वीर प्रदान करता है, जिससे समन्वित हवाई रक्षा संचालन संभव हो पाता है। यह दुश्मन के विमानों, ड्रोन और मिसाइलों का पता लगाने, ट्रैकिंग करने और उन्हें निशाना बनाने के लिए स्वचालित रूप से डिजाइन किया गया सिस्टम है।

हमारा आकाशतीर, आयरन डोम से कम नहीं
हरियाणा की महिला पहलवानों पर बनी एक हिंदी फिल्म का प्रसिद्ध संवाद है कि हमारी छोरियां (लड़कियां) छोरों से कम हैं क्या। ऑपरेशन सिंदूर के भारत के अभेद्य सुरक्षा कवच आकाशतीर पर यह संवाद सटीक बैठता है। आकाशतीर ने जिस तरह से पाकिस्तान के तरफ से आने वाले ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही तितर-वितर कर दिया, उससे यह कहने में जरा भी अतिशयक्ति नहीं है कि हमारा आकाशतीर इस्राइल के आकाश डोम या रूस के एस-400 से कम है क्या। आयरन डोम इस्राइल का रक्षा कवच है जो दुश्मन के किसी भी खतरे को आने से रोकता है। वहीं एस-400 रूसी वायु रक्षा प्रणाली है, जिसकी पांच इकाइयां भारत ने भी खरीदी हैं।

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रक्षा मंत्रालय ने इस प्रणाली को लेकर क्या कहा
रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि 9-10 मई की रात पाकिस्तान ने बड़ा और संगठित मिसाइल व ड्रोन हमला किया, जिसका निशाना भारतीय सेना और नागरिक ढांचा था। इस हमले के बीच भारत ने एक खामोश ताकत 'आकाशतीर' को पेश किया, जिसमें स्थिति को बदल दिया। 
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मंत्रालय ने कहा, इस पूरी तरह से स्वदेशी और स्वचालित (ऑटोमैटिक) वायु रक्षा प्रणाली (एयर डिफेंस सिस्टम) ने खतरे की सटीकता का पता लगाया, उसकी निगरानी की और उसे निष्प्रभावी कर दिया। यह आधुनिक युद्ध में एक ऐतिहासिक क्षण था। इसने आगे कहा, पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियां इंसानी मदद और तय बुनियादी ढांचे पर निर्भर करती हैं। वहीं, आकाशतीर कई रडार, सेंसर और संचार नेटवर्क को रियल-टाइम मोबाइल कमांड सिस्टम से जोड़ता है। यह प्रणाली आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत विकसित की गई है। यह प्रणाली सेना, नौसेना और वायु सेना में निर्बाध रूप से संचालित होती है, क्योंकि यह आईएसीसीएस और त्रिगुण नेटवर्क के साथ जुड़ी हुई है। 

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