जिस पाकिस्तान के एक के बाद एक सैन्य ठिकाने भारत की जवाबी कार्रवाई में निशाना बन रहे थे, उसका अचानक संघर्ष विराम के लिए राजी हो जाना किसी नाटकीय घटनाक्रम से कम नहीं था। शाम 6 बजे भारत ने संघर्ष विराम की पुष्टि की थी और बताया कि पाकिस्तान की पहल पर बातचीत हुई और दोनों देश सीजफायर के लिए राजी हुए। ऐसा प्रतीत हुआ कि भारत का कड़ा रुख तो जारी रहेगा, लेकिन सरहदों पर हालात सामान्य हो जाएंगे। हालांकि, ऐसा हुआ नहीं। पाकिस्तान अपनी फितरत से बाज नहीं आया और उसने संघर्ष विराम तोड़ने की हिमाकत कर दी। सबसे पहले श्रीनगर में धमाके सुने गए। नियंत्रण रेखा पर फायरिंग हुई। कच्छ जैसे इलाकों में ड्रोन देखे गए। खबर लिखे जाने तक कई कई शहरों में ताबड़तोड़ ब्लैकआउट हो चुका था।
2. भारत का रक्षा कवच भेद नहीं पाया पाकिस्तान, उल्टा उसके सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा
3. नौ आतंकी ठिकानों की वजह से शर्मसार हुआ पाकिस्तान
इससे पहले भारत ने मुजफ्फराबाद में सवाई नाला कैम्प और मरकज सैयदना बिलाल कैम्प, कोटली में गुलपुर कैम्प और अब्बास कैम्प, भीमबेर में बरनाला कैम्प, सियालकोट में सरजल कैम्प और महमूना जोया कैम्प, मुरीदके में मरकज तैयबा कैम्प और बहावलपुर में मरकज सुभानअल्लाह कैम्प को नेस्तनाबूद कर दिया था। पाकिस्तान ने स्वीकार किया कि भारत ने मिसाइल हमले किए हैं। इससे उसे दुनियाभर में शर्मिंदगी उठानी पड़ी। 13 सैन्य और नौ आतंकी ठिकानों को मिलाकर उसे कुल 22 ठिकानों पर मुंह की खानी पड़ी।
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4. दुनिया में नहीं मिला साथ
अगर सिर्फ तुर्किये को छोड़ दें कि किसी भी देश ने खुलकर पाकिस्तान का साथ नहीं दिया। पाकिस्तान को रक्षा साजो-सामान की आपूर्ति करने वाला चीन भी दोनों पक्षों से शांति और संयम की अपील करता रहा। वहीं, अमेरिका, रूस, इस्राइल, ब्रिटेन जैसे देश पहलगाम आतंकी की निंदा कर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के प्रति समर्थन जाहिर कर चुके थे। अमेरिका ने पाकिस्तान पर जाहिर तौर पर दबाव बनाया।
5. सरकार का सख्त संदेश
संघर्ष विराम से पहले भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने कहा कि भविष्य में कोई भी आतंकी वारदात होने पर उसे देश के खिलाफ 'युद्ध की कार्रवाई' माना जाएगा।
6. ट्रंप ने श्रेय लेने की कोशिश की
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष विराम का श्रेय लेने की कोशिश की। उन्होंने भारतीय समयानुसार शाम 5:25 बजे सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। इसमें उन्होंने रातभर बातचीत चलने और 'मध्यस्थता' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, ''अमेरिका की मध्यस्थता में रातभर चली बातचीत के बाद मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत और पाकिस्तान पूरी तरह और तुरंत संघर्ष विराम के लिए राजी हो गए हैं। मैं दोनों देशों को सामान्य सूझबूझ के लिए बधाई देता हूं। इस बारे में ध्यान देने की धन्यवाद!''
7. अमेरिकी विदेश मंत्री एक एकदम आगे बढ़ गए
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने 12 ही मिनट बाद एक कदम आगे जाकर ट्वीट किया। इसमें दोनों देशों के प्रधानमंत्री और बाकी नेतृत्व का जिक्र किया और विस्तृत मुद्दों पर चर्चा की बात कह दी। उन्होंने कहा, ''उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और मैंने भारत और पाकिस्तान क कई वरिष्ठ अधिकारियों से बात की। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिफ आसिम मुनीर और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आसिम मलिक शामिल थे। दोनों ही देश तुरंत संघर्ष विराम करने और एक निष्पक्ष स्थान पर विस्तृत मुद्दों पर बातचीत को तैयार हो गए हैं। हम प्रधानमंत्री मोदी और शरीफ की उनकी बुद्धिमत्ता और राजनीतिक कौशल के लिए तारीफ करते हैं कि उन्होंने शांति का रास्ता चुना।''