भारत और पाकिस्तान ने शुक्रवार को घोषणा की कि वे राजनयिकों से व्यवहार को लेकर सभी मुद्दे मिलकर सुलझाने को तैयार हैं। दोनों देश अभी तक एक-दूसरे पर अपने-अपने राजनयिक के उत्पीड़न का आरोप लगाते रहे हैं। शुक्रवार को दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों ने अपने-अपने यहां इस मुद्दे को आपसी वार्ता से सुलझाने की घोषणा की। हालांकि ये वार्ताएं कब शुरू होंगी, इसको लेकर दोनों ही देशों ने कोई टाइमलाइन जारी नहीं की है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, भारत और पाकिस्तान अपने राजनयिकों व डिप्लोमेट दर्जे वाले कार्यालयों में काम करने वालों को प्रताड़ित करने का मुद्दा वर्ष 1992 के कोड ऑफ कंडक्ट के तहत सुलझाने को तैयार हो गए हैं। ठीक ऐसा ही बयान पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने भी अपने यहां जारी किया। बता दें कि ये कोड ऑफ कंडक्ट दो देशों को एक-दूसरे के राजनयिकों की जासूसी कराने और उनके खिलाफ अभद्र भाषा या शारीरिक उत्पीड़न जैसे व्यवहार करने से भी रोकता है।
क्यों पड़ी है आवश्यकता
मार्च की शुरुआत में भारत ने पाकिस्तान से शिकायत की थी कि इस्लामाबाद स्थित भारतीय मिशन के अधिकारी लगातार प्रताड़ित और धमकी भरे व्यवहार का सामना कर रहे हैं। भारत ने 22 मार्च को पाकिस्तान विदेश मंत्रालय को भारतीय दूतावास के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 3 बार उत्पीड़न वाला व्यवहार करने से जुड़ा अपना 16वां मौखिक नोट भी सौंपा था। उधर, पाकिस्तान ने भी 7 मार्च से अपने राजनयिकों के साथ 26 बार ऐसे ही व्यवहार का आरोप लगाते हुए अपने राजदूत सोहेल महमूद को वापस बुला लिया था। बाद में महमूद 22 मार्च को वापस भारत लौटे थे।